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‘मंत्री न होता तो एसपी को चैंबर से खींचकर मारता’

Sat, 22 Oct 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर के खानजहांपुर में आयोजित एक समारोह के दौरान कुछ इस तरह बिगड़े थ्‍ाे दुग्ध विकास मंत्री के बोल। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा के बिगड़े बोल एक बार फिर सामने आए हैं। जिले में तैनात रह चुके एक एसपी को लेकर उन्होंने दो दिन पूर्व मंच से जो आपत्तिजनक व अभद्र टिप्पणी की थी, अब उसका वीडियो सामने आया है।
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इसमें उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री ने उनसे एसपी को लेकर चर्चा की तो मैने मुख्यमंत्री से कहा कि यदि मंत्री न होता तो उसे चैंबर से खींचकर जूते से मारता। इससे पहले इब्राहिमपुर थाने में तैनात एक दरोगा को फोन पर अपशब्द कहने व धमकी देने का ऑडियो भी वायरल हो चुका है। दरोगा ने इसकी लिखित शिकायत भी की थी। 

दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा का ताजा मामला एक एसपी को लेकर अभद्र टिप्पणी का है। दो दिन पूर्व अकबरपुर तहसील के खानजहांपुर में एक फैक्ट्री के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री राममूर्ति वर्मा ने कहा था कि वे कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए सीमा लांघ सकते हैं।
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मुख्यमंत्री से पूर्व में हुई अपनी वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि यहां तैनात एक एसपी को लेकर सीएम ने कहा कि उन्होंने उसके बारे में गलत कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री से बोल दिया कि मैं मंत्री न होता तो उसे चैंबर से खींचकर जूते से मारता। मंत्री ने इसमें अपशब्दों का भी प्रयोग किया। मंत्री का यह वीडियो अब सामने आया है।

गौरतलब है कि मंत्री ने जिस एसपी को लेकर यह तल्ख टिप्पणी की है, उस एसपी ने यहां अपने कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों के दखल को एकदम रोक दिया था। भूमि से जुड़े एक बड़े मामले में सपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता के विरुद्ध एफआईआर करा देने के चलते ही एसपी चर्चा में आ गए थे। कई अन्य मामलों में भी सपा नेताओं की इच्छा के विपरीत एसपी ने वह निर्णय लिया जो उन्हें लेना था।

बताते चलें कि मंत्री ने इससे पहले इब्राहिमपुर थाने में तैनात रहे दरोगा संजय यति को फोन पर न सिर्फ धमकी दी थी, वरन कई अपशब्दों का भी प्रयोग किया था। उसका ऑडियो वायरल हो गया था। दरोगा ने मामले की लिखित शिकायत भी की थी।

उधर, अब इस पूरे प्रकरण पर मंत्री राममूर्ति वर्मा ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने सिर्फ कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात की थी। उनका किसी अधिकारी या कर्मचारी से कोई विवाद नहीं। उन्होंने कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है।
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