ट्रांसफार्मरों की गड़बड़ी ने अकबरपुर व टांडा तहसील क्षेत्र के लगभग 35 हजार उपभोक्ताओं को पूरी रात अंधेरे में रखा। शुक्रवार शाम तक आपूर्ति बहाल करने का प्रयास चल रहा था लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। उपभोक्ताओं ने ट्रांसफार्मर की आपूर्ति करने वाली संस्था के कार्यों की जांच व बेहतर ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति कराने की मांग की है।
उपभोक्ताओं ने कहा कि ऐसा न होने के चलते ही घटिया ट्रांसफार्मरों से लंबे समय तक आपूर्ति नहीं हो पाती है और इसका खामियाजा आखिरकार उन्हें ही भुगतना पड़ता है। तमाम मांग के बाद भी ओवरलोडेड चल रहे ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाए जाने को लेकर पावर कारपोरेशन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों एवं मानक के अनुरूप निर्माण न होने का ही नतीजा रहा कि गुरुवार देर शाम तक अकबरपुर व टांडा तहसील क्षेत्र के 10 ट्रांसफार्मर अलग-अलग क्षमता के फुंक गए। नतीजतन संबंधित ट्रांसफार्मरों से जुड़ी लगभग 35 हजार आबादी को पूरी रात अंधेरे में गुजारने को मजबूर होना पड़ा।
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के मालीपुर रोड, फैजाबाद रोड व बसखारी रोड स्थित आधा दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर जवाब दे गए। उपभोक्ताओं को पहले तो लगा कि किसी स्थानीय गड़बड़ी से ऐसा हुआ है लेकिन बाद में ट्रांसफार्मर की खराबी की बात पता चली तो वे मायूस हो गए। दरअसल ट्रांसफार्मरों के फुंकने व बिगड़ने के बाद उन्हें बदले जाने में काफी वक्त लगता है।
इसके चलते ही उपभोक्ताओं में चिंता व्याप्त हो गई। वे ट्रांसफार्मर को जल्दी से बदलवाने के लिए शुक्रवार सुबह से ही जुट गए। हालांकि शाम होने तक इसमें सफलता नहीं मिली। यही हाल टांडा तहसील क्षेत्र के एनटीपीसी इलाके व केदारनगर समेत उतरेथू आदि क्षेत्रों का भी रहा। इन क्षेत्रों के भी चार ट्रांसफार्मर गुरुवार दोपहर बाद से लेकर देर रात तक अलग-अलग कारणों से जवाब दे गए।
इससे इन क्षेत्रों की भी बिजली ठप पड़ गई। पूरी रात बिजली न आने से उपभोक्ताओं को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दोनों क्षेत्र के लगभग 35 हजार उपभोक्ताओं को ऐसे में पूरी रात बिना बिजली के ही गुजारना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि दरअसल ट्रांसफार्मर के निर्माण में मानकों की अनदेेखी की जाती है। इसके चलते ही आए दिन ये जवाब देते रहते हैं।
संबंधित अधिकारियों को इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित संस्था पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, खामियाजा उपभोक्ताओं को ही भुगतना होगा। वरिष्ठ सराफा व्यवसाई वीरेंद्र सेठ व चिकित्सक डॉ. आरसी गुप्त ने कहा कि घटिया ट्रांसफार्मर निर्माण की जांच समय-समय पर की जानी चाहिए। अधिशाषी अभियंता मुकेश बाबू ने बताया कि जिन क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बिगड़े हैं, वहां उपलब्धता के प्रयास चल रहे हैं। जल्द ही ट्रांसफार्मर बदल दिए जाएंगे।