अबेंडकरनगर। मलेरिया रोग को लेकर जागरूकता अभियान में स्टाफ का टोटा आड़े आ रहा है। विभाग के पास मात्र दो मलेरिया इंस्पेक्टर की ही तैनाती है। ऐसे में मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए दूसरे विभागों का सहारा लेना पड़ता है। पूर्व में जिला प्रशासन ने सात अन्य पद सृजित किए जाने के लिए शासन को पत्र लिखा था, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हो सका।
जिले में मलेरिया विभाग में जिला मलेरिया अधिकारी के अलावा दो मलेरिया निरीक्षक की तैनाती है। इनके अलावा सहायक मलेरिया अधिकारी, फिल्ड वर्कर के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। बताते चलें कि जनपद की पांच तहसीलों में कुल नौ ब्लॉक हैं। सभी ब्लॉकों को मिलाकर सिर्फ दो ही पद स्वीकृत हैं। इससे सभी ब्लॉकों में सुचारु ढंग से जागरूकता अभियान नहीं चल पा रहा।
शासन ने एक जुलाई से 31 जुलाई तक मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चला रखा है। अभियान के तहत शहरी व गांवों क्षेत्रों में ग्राम प्रधान व निकाय कर्मचारियों के सहारे दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही अभियान के अंर्तगत आशा बहू घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। संचारी रोग से निपटने के लिए मलेरिया विभाग के अलावा कई अन्य विभाग के कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
मलेरिया के लक्षण व बचाव
मलेरिया अधिकारी नवनिधि मिश्रा ने बताया कि उल्टी होना, पेट में दर्द होना, शरीर में ऐंठन होना, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द होना तेज बुखार होना, सिर में दर्द होना मलेरिया के लक्षण होते हैं। मलेरिया से बचने के पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर और मच्छरदानी लगा कर सोएं। साथ ही घर के आसपास साफ-सफाई रखें। कहीं जलभराव हो तो वहां पर दवा का छिड़काव करें। पीने के पानी को ढक कर रखें। घर के आसपास पानी को इकट्ठा न होने दें और मच्छर रोधी क्रीम लगाएं।
पूर्व में भेजा गया पत्र
मलेरिया विभाग के पास स्टाफ की कमी है। पूर्व में स्टाफ की समस्या को लेकर स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र भेजा गया है। अन्य विभागों के सहयोग से मलेरिया बचाव व जागरूकता का कार्य चल रहा है। -डाॅ. राजकुमार सीएमओ