अंबेडकरनगर। जिले में मरीजों की उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र राजकीय मेडिकल कॉलेज, सद्दरपुर तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के बीच यहां बेहतर इलाज मरीजों के लिए सपना ही बना हुआ है। चिकित्सकों के 104 पद के सापेक्ष मात्र 49 पर ही तैनाती है। 55 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई व अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से ये मरीजों के किसी काम की नहीं हैं।
सीटी स्कैन व अल्ट्रा साउंड के लिए आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल तक की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ता है। स्टाफ नर्स के 266 पद के सापेक्ष 261, टेक्नीशियन के 18 पद के सापेक्ष 15 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में जांच व इलाज के लिए हर दिन आने वाले करीब ढाई हजार मरीजों को यहां खास इलाज नहीं मिल पाता है।
मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए लगभग एक दशक पूर्व सद्दरपुर बाजार में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई थी। विभिन्न प्रकार की जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना भी की गई। मरीजों व उनके तीमारदारों को उम्मीद थी कि अब उन्हें बेहतर इलाज के लिए इधर उधर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
हालांकि, समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदों पर पानी फिरने लगा। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती पूर्व में हुई थी, लेकिन लगभग एक वर्ष से अधिक समय से पद खाली पड़ा रहने के चलते सीटी स्कैन, एमआरआई व अल्ट्रा साउंड का कार्य पूरी तरह ठप है। सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
रेडियोलॉजिस्ट की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन नतीजा सिफर। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में 19 वेंटीलेटर हैं। टेक्नीशियन न होने के चलते इनका प्रयोग नहीं हो रहा। ये भी निष्प्रयोज्य पड़े हुए हैं।
चिकित्सकों व स्टॉफ नर्स का है टोटा
राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के कुल 104 पद सृजित हैं। इनके सापेक्ष 55 पद लंबे समय से रिक्त हैं। स्टॉफ नर्स के 266 पद सृजित हैं। मात्र 65 पर तैनाती है। 261 पद रिक्त हैं। टेक्नीशियन के 18 पद हैं। 15 पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिन 3 पद पर तैनाती है, उनमें से दो टेक्नीशियन जहांगीरगंज व भियांव सीएचसी से संबद्ध हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते हर दिन इलाज के लिए यहां आने वाले ढाई हजार मरीजों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्टॉफ नर्स की कमीं के चलते अक्सर इमरजेंसी सेवा भी प्रभावित होती है। टेक्नीशियन की कमी होने के चलते जांच के लिए आने वाले मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है।
उठाए जाएं ठोस कदम
सीटी स्कैन के लिए मंगलवार को पहुंचे मरीज सुनील ने कहा कि बड़ी उम्मीद के साथ यहां आए थे। बताया गया कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से सीटी स्कैन नहीं हो सकेगा। अब मजबूर होकर जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचे टांडा के जलालुद्दीन को भी जिला अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ा। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मरीजों का बेहतर इलाज हो सके इसके लिए शासन को ठोस कदम उठाना चाहिए। जहांगीरगंज से बेटे का इलाज कराने पहुंचे राघवेंद्र ने कहा कि मात्र एक बालरोग चिकित्सक बैठने के चलते भीड़ अधिक थी। लंबी लाइन देख अब जिला अस्पताल जा रहे हैं। तीमारदार राजेश, सुनील, इश्तियाक व जेबा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सिर्फ नाम का मेडिकल कॉलेज है। यहां न तो चिकित्सक हैं और न ही जांच के लिए लगी मशीनों का लाभ मिलता है।
रेडियोलॉजिस्ट, चिकित्सक व कर्मचारियों के रिक्त चल रहे पद पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। स्थानीय स्तर पर मरीजों को अधिकतम सुविधा देने का प्रयास पूरी जिम्मेदारी से किया जा रहा है।
- डॉ. पीके सिंह, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज