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परिषदीय स्कूल खुलते ही कई तरह की चुनौतियों से जूझेंगे छात्र

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अंबेडकरनगर। रस्मी तैयारियों के बीच एक जुलाई से परिषदीय स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को कई तरह की मुश्किलों से जूझना होगा। बच्चों को बांटने के लिए अब तक बैग नहीं पहुंच पाए हैं। सिर्फ टेंडर ही हो सका है। विभाग का दावा है कि लगभग सभी किताबें व जूते-मोजे विद्यालयों तक पहुंचा दिए गए हैं, जबकि ड्रेस के लिए रकम खातों में भेज दी गई है। यह बात अलग है कि सच्चाई इससे कोसों दूर है।
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सूत्रों का कहना है कि जुलाई माह के पहले पखवारे तक करीब सवा दो लाख बच्चों के बीच किताब, जूते-मोजे व ड्रेस का वितरण हो पाना सुस्त तैयारियों के चलते संभव नहीं लग रहा। पंजीकृत बच्चों को आधार कार्ड बनवाने को लेकर ही तेजी नहीं है। और तो और विद्यालयों की रंगाई-पुताई का काम भी अब तक नहीं हो पाया है, जबकि विद्यालय खुलने में तीन दिन ही बचे हैं।
सरकार ने ग्रीष्मावकाश के बाद परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को विशेष मुहिम छेड़ रखी है। इसी क्रम में 25 जून से ही विद्यालयों को खोलकर शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कने का निर्देश दिया था ताकि सभी जरूरी तैयारियां मुकम्मल की हा सकें। हालांकि, बीते दिनों जब नया शिक्षा सत्र शुरू हुआ था तभी से व्यवस्थाओं को लेकर बेसिक शिक्षा महकमा गंभीर नहीं है।
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विभागीय अधिकारी सिर्फ रस्म अदायगी तक सीमित है, जिससे उसका प्रतिकूल असर शिक्षकों की लापरवाही के तौर पर सामने आया है। गौरतलब है कि जिले में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1353 व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 520 है। इन विद्यालयों में 2 लाख 12 हजार 755 छात्र छात्राएं अब तक पंजीकृत हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार इनके लिए सभी पुस्तकें उपलब्ध हो चुकी हैं, जिन्हें संबंधित विद्यालयों को वितरित भी कर दिया गया है। जूता, मोजा भी विद्यालयों की सुपुर्दगी में पहुंच गया है। एक जुलाई को प्राथमिकता के आधार पर उसका वितरण भी होगा। ड्रेस के लिए 7 करोड़ रुपए की धनराशि आई थी। विद्यालय प्रबंध समितियों के खाते में भेजी जा चुकी है। बैग के लिए शासन को छात्र संख्या भेज दी गई है। नामित कंपनी के बैग उपलब्ध कराते ही बच्चों में वितरण किया जाएगा।
बच्चों का डाटा बेस तैयार करने में आधार की अनुपलब्धता गुरुजनों को इस बार भी परेशान करेगी। कारण यह कि वर्ष 2018 में शासन ने पांच कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी सौंपी थी कि वह विद्यालय में पहुंचकर बच्चों का नि:शुल्क आधारकार्ड बनाएं। परन्तु पूरा वर्ष बीत गया और एक भी संस्था किसी विद्यालय में कैंप लगाकर बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना सकी। वरिष्ठ लिपिक सत्यप्रकाश मौर्य ने बताया कि प्राथमिक के 1 लाख 20 हजार 412 बच्चों के सापेक्ष 70 हजार 900 बच्चों के पास ही आधार कार्ड है। शेष 49 हजार 512 बच्चों के पास आधारकार्ड ही नही है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय के 35 हजार 632 के सापेक्ष 27 हजार 39 बच्चों के पास ही आधार है। 8 हजार 593 बच्चे बगैर आधार के ही विद्यालय में पंजीकृत हैं।
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गरमा-गरम व पौष्टिक भोजन देने के लिए शासन ने बीते वर्षों में जिले को अक्षय पात्र योजना के तहत चयनित किया था। जिले में 16 करोड़ से अधिक लागत से अत्याधुनिक रसोईघर का निर्माण होना था। इसके लिए भूमि व पैसा तो मिल गया, लेकिन अब तक कार्यदायी संस्था अक्षय पात्र रसोईघर का निर्माण नहीं हो सका। ऐसे में साफ जाहिर है कि इस बार भी बच्चों को इस आधुनिक सुविधा के तहत पौष्टिक भोजन मिल पाना संभव नहीं है।
निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए विभाग के पास जिले के 535 बच्चों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन अब तक किया है। लिपिक हृदयकुमार मिश्र ने बताया कि इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जो बच्चे पात्रता श्रेणी में आएंगे, उन्हें शासन से उपलब्ध होने की सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा। अब तक जिन बच्चों ने आवेदन किया था, उनकी सूची शासन को प्रेषित कर दी गई है।
विद्यालयों के खुलने में अभी तीन दिन का समय शेष है। पूर्व में ही सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि एक जुलाई को स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को पुस्तक, जूता मोजा व एमडीएम का लाभ दिया जाए। विद्यालय में साफ सफाई, पेयजल व शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त रखने के भी निर्देश हैं। जल्द ही खंड शिक्षा अधिकारियों से आवश्यक रिपोर्ट भी तलब की जाएगी।
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- अतुल कुमार सिंह, बीएसए
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