अंबेडकरनगर। रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। ऐसे में इस माह में जरूरतमंदों की अधिक से अधिक मदद करें। मदद इस प्रकार से करें कि एक हाथ से दें, तो दूसरे हाथ को भी पता न चले। अल्लाह ने कुरान में फरमाया है कि मदद करते समय सामने वाले को एहसास नहीं होना चाहिए कि वह मौजूदा समय में जरूरतमंद है। कोई ऐसी बात उससे न कहें, जिससे उसके दिल को ठेस पहुंचे। यह अपील रविवार को धर्मगुरुओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों से की।
वरिष्ठ शिया धर्मगुरू मौलाना मोहम्मद अब्बास ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि पवित्र रमजान माह रहमतों का महीना है। अल्लाह इस माह में खुद अपने बंदों के लिए मेहमान होता है। ऐसे में कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे अल्लाह नाराज हो। कहा कि इस पवित्र माह में बिना भेदभाव जरूरतमंदों की बढ़-चढ़कर मदद करें। मदद करते समय यह न देखें कि वह किस मजहब से ताल्लुक रखता है।
इस्लाम में मजहब को नहीं, बल्कि इंसानियत को सबसे ऊपर करार दिया है। सामाजिक संस्था अल इमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन ख्वाजा शफाअत हुसैन ने अपील करते हुए कहा कि किसी की मदद करते हुए इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उसकी खुद्दारी पर कहीं से आंच न आए। रात में जरूरतमंद की मदद करें, जिससे कोई अन्य न देख सके।
सुन्नी धर्मगुरू व शहर इमाम हाफिज शकील अख्तर ने कहा कि कोरोना का संकट चल रहा है। चारों तरफ अफरातफरी का माहौल है। ऐसे में ईद की खुशियां मनाते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि कोई जरूरतमंद भूखा न रहे। उसके बच्चे ईद की खुशियों से वंचित न रहें।
हाफिज मोहम्मद निसार अहमद ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम ऐसे लोगों की मदद करें, जो मौजूदा हालात में परेशान हैं। इसमें यह कतई न देखें कि वह किस मजहब का है। शिया धर्मगुरू मौलाना नूरुलहसन ने कहा कि एक न एक दिन हम सभी को मौत की आगोश में सो जाना है। ऐसे में दुनिया को पाने के लिए इतना मशगूल न हो जाएं कि दीन ही भूल जाएं। ऐसे में इस पवित्र माह में जरूरतमंदों की बढ़-चढ़कर मदद करें।