आसमान से बरसती आग ने रविवार को आम जनजीवन बेहाल कर दिया। पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चिलचिलाती धूप में लोग झुलस उठे। पेड़ की छांव व पंखों से भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही थी। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों तक पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। यह सब अचानक नहीं हो गया। इस नौबत के जिम्मेदार हम खुद हैं।
प्रदूषण रोकने को लेकर जिले में किसी को कोई चिंता नजर नहीं आती। देश के गंदे शहरों में शुमार होने के बाद भी सार्वजनिक जगहों पर फैले कूड़े-कचरों को लेकर बेफिक्री सी पसरी है। फर्ज अदायगी के अलावा सरकारी महकमा इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। न तो वायु प्रदूषण और न ही ध्वनि प्रदूषण रोकने को लेकर जिले में प्रत्यक्ष तौर पर कोई अभियान लंबे समय से चल सका है।
यह हाल तब है जब जिले को इसी वर्ष के अंत तक खुले में शौच मुक्त किए जाने का लक्ष्य मिला हुआ है। यूं तो पिछले कई दिनों से लगातार गर्मी का दौर चला आ रहा था लेकिन रविवार की गर्मी ने पिछले कई दिनों के रिकार्ड ध्वस्त कर दिए।
पखवारे से अधिक समय से जिले में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास था, लेकिन रविवार को इस वर्ष के पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हर कोई गर्मी से बेहाल हो उठा। शहर से लेकर गांव तक चारों तरफ भीषण गर्मी से लोग जूझते नजर आए।
रविवार सुबह से ही मौसम के इस तेवर ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। न तो पेड़ों की छांव कोई राहत दे पा रही थी और न ही पंखे के सहारे गर्मी से जूझने में सफलता मिल रही थी। मौसम का मिजाज इतना कड़ा था कि पंखे के सहारे बैठे लोग भी पसीने से तर-बतर हो रहे थे।
अवकाश के चलते सरकारी कर्मचारियों को तो गर्मी में पसीने बहाने से निजात मिली थी लेकिन गैर सरकारी कार्यालयों व संस्थाओं के कर्मचारी गर्मी के चलते ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। घरों में महिलाओं को दैनिक कामकाज निपटाने में कठिनाई हुई तो वहीं विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों में भी कर्मचारियों व मजदूरों का हाल बेहाल था।