जलालपुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के पाभीपुर गांव के दिनकरपुर पुरवा स्थित सरकारी नलकूप विगत 15 वर्षों से पूर्ण रूप से निष्क्रिय पड़ा हुआ है। इसके भरोसे खेती करने वाले दर्जनों किसानों को आज सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। खेतों में धान की नर्सरी डालने का समय है, लेकिन पानी की अनुपलब्धता के कारण किसान गहरी चिंता में हैं। विभागीय उपेक्षा के चलते लगभग 200 बीघा कृषि भूमि की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सरकारी सिंचाई सुविधा के अभाव में किसानों को डीजल इंजन, ट्यूबवेल और ट्रैक्टर चालित पंपों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत दोगुनी हो गई है। गर्मी के मौसम में हर दूसरे दिन पानी की जरूरत पड़ रही है, जबकि निकटवर्ती प्राकृतिक स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। अधिशासी अभियंता पुनीत चौधरी ने बताया कि बंद नलकूपों का सर्वे कराकर उन्हें चालू कराया जाएगा।
मरम्मत के अभाव में हुआ निष्क्रिय
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह नलकूप 1990 के दशक में स्थापित किया गया था। कुछ वर्षों तक सीमित रूप से संचालन में रहने के बाद तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। समय पर मरम्मत न होने के कारण यह पूरी तरह से बंद हो गया। किसानों ने कई बार संबंधित विभाग को लिखित सूचना दी, किंतु कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
जा रही किसानों की गाढ़ी कमाई
कई बार सांसद व विधायक को अवगत कराया गया, लेकिन किसी भी स्तर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। किसान अपनी पूरी आय निजी संसाधनों में झोंक कर फसलें बचा रहे हैं।
- राम आशीष यादव, ग्राम प्रधान
सिर्फ पारंपरिक फसलों का सहारा
यदि नलकूप संचालित हो जाए तो क्षेत्र में सब्जियों व अन्य नकदी फसलों की खेती भी संभव हो सकेगी। वर्तमान में सिर्फ गेहूं व धान जैसी पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
- राजेश निषाद, कुसौरा
नहीं हुए प्रयास
पिछले वर्षों में कई बार अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन न तो कोई निरीक्षण हुआ और न ही मरम्मत का कोई प्रयास शुरू हुआ।
- भूप नारायण पांडेय, किसान