जफराबाद मोहल्ले के लोगों को यह यकीन कर पाना कठिन हो रहा है कि शंात व मिलनसार स्वभाव का इब्ने अब्बास अब उनके बीच नहीं है। कुवैत में जुमे की नमाज के वक्त हुए आतंकी धमाके में इब्ने के मारे जाने की खबर आने के बाद से ही समूचे मोहल्ले में मातम का माहौल है।
इब्ने के पिता मंगर उर्फ इब्ने की पूर्व में ही मौत हो चुकी है। मौत की खबर आने के बाद से मां हसन बानो का रो रोकर बुराहाल है। मोहल्ले की जो औरतें सांत्वना देने के लिए पहुंच रही हैं, वे भी परिवार का हाल देखकर अपने आंसू नहंी रोक पा रही हैं। चार भाईयों में इब्ने सबसे छोटा था।
बड़ा भाई हसन अब्बास और छोटा भाई रजी सऊदीअरब में रहकर रोजगार करता है, तो मझला भाई वसी घर पर ही रहता है। इब्ने भी लम्बे समय से यहीं पर था। वह बीते मार्च माह में ही कुवैत गया था, जहां उसके चाचा रमजान अली भी रहा करते हैं। अभी उसका विवाह नहीं हुआ था। रोजी रोटी के सिलसिले में कुवैत जाने के बाद वह वहां एक वाहन पर चालक के तौर पर काम करने लगा था।
परिवार की उम्मीदें परवान चढ़ रही थीं। दो बहनों में से बड़ी बहन का विवाह हो चुका है, जबकि छोटी बहन सहनूर 12 वर्ष अपने भाई को खो देने के गम में लगातार आंसू बहा रही है। परिवार को ढांढ़स बधाने के लिए स्थानीय लोगों के अलावा रिश्तेदार व अन्य लोगों का पहुचना लगातार जारी है।
उधर हमले में अहमद के घायल होने की खबर मिलने के बाद से उसके मुस्तफाबाद नगपुर स्थित घर पर भी लोग लगातार पहुंच रहे हैं। चार भाईयों में अहमद सबसे बड़ा है, जबकि दूसरे नंबर का भाई अली हसन सऊदी अरब में रहता है। मझला भाई कासिम कुवैत में ही रहता है।
सबसे छोटा भाई मोहम्मद हसन पढ़ाई कर रहा है। पिता इरशाद बुनकर हैं। जफराबाद निवासी आतंकी हमले में घायल कम्मरजा भी तीन भाईयों में सबसे बड़ा है। उसके दोनों छोटे भाई हसन अब्बास व मोहम्मद अब्बास यहीं रहकर पढ़ाई करते हैं। चार बहनों में से दो कनीज व फातिमा का विवाह हो चुका है, जबकि दो अन्य बहनें किरदार व जिया घर पर ही हैं। पिता सिराजुलहक भी बुनकर मजदूर हैं।