अंबेडकरनगर। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना जिले में मरीजों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। कारण यह कि सवा लाख से अधिक पात्र होने के बावजूद सिर्फ 35 हजार के ही गोल्डन कार्ड बन पाए हैं। नतीजा यह है कि करीब एक लाख पात्रों को अब भी योजना के लाभ का इंतजार हुआ है।
कमजोर वर्ग के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का शुभारंभ किया गया था। यह योजना जिले में गति नहीं पकड़ पा रही है। एक लाख 37 हजार 462 पात्रों का चयन योजना के तहत हुआ है। हालांकि, अब तक सिर्फ 35016 पात्रों का ही गोल्डन कार्ड बन पाया है। ऐसे में साफ है कि करीब एक लाख पात्रों को अब भी गोल्डन कार्ड का इंतजार है। जिले में सात अस्पताल योजना के तहत संबद्ध हैं।
इसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के अलावा टांडा, जलालपुर व बसखारी सीएचसी शामिल है। दो निजी अस्पतालों कनक मैटरनिटी व ट्रॉमा सेंटर मोहसिनपुर और रामा हॉस्पिटल राहुलनगर को भी योजना के तहत शामिल किया गया है। इन सात अस्पतालों में 1184 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। हालांकि, जिले के निवासी व योजना में शामिल पात्रों में से 1486 पात्र योजना का लाभ उठा चुके हैं, लेकिन इनमें से 1184 ने ही जिले में लाभ उठाया है। जिले के 302 मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने अपना इलाज दूसरे जिलों में कराया है।
आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थी परिवार को एक साल में पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा का प्रावधान है। परिवार के मुखिया के साथ ही अधिकतम पांच सदस्यों को योजना का लाभ मिलता है। इन सभी सदस्यों को मिलाकर पांच लाख रुपये तक का इलाज एक वर्ष में उन अस्पतालों में हो सकता है जो इसके लिए पंजीकृत हैं। इलाज के लिए पात्रों को गोल्डन कार्ड बनवाना अनिवार्य है। इसी कार्ड के आधार पर इलाज कराया जाता है।
जिले में करीब 1 लाख पात्र ऐसे हैं जो अभी भी गोल्डेन कार्ड के लिए भटक रहे हैं। पात्रों का कहना है कि लंबे समय से गोल्डेन कार्ड बनवाने के लिए वे सब दौड़ रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। जलालपुर निवासी राधेश्याम ने बताया कि पिछले कई माह से भटकने के बावजूद कार्ड नहीं बन पा रहा है। बेवाना की कनकलता का कहना था कि जिला अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय तक का चक्कर लगाया, लेकिन कार्ड नहीं बन पाया। टांडा की रुखसाना ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों से की गई शिकायत का भी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। ऐसा लग रहा कि गोल्डेन कार्ड बनाने को लेकर ही रुचि नहीं ली जा रही है। उधर कुछ इसी तरह का दर्द कई अन्य मरीजों ने भी प्रकट किया।
जिले के सभी जनसेवा केंद्रों पर गोल्डेन कार्ड बनाने की सुविधा उपलब्ध है। संचालकों द्वारा प्रति कार्ड 20 रुपये लेकर उसे पात्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है। आशा बहुओं को पात्रों की सूची सौंपकर उन्हें गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रेरित करवाया जा रहा है। साथ ही आयुष्मान भारत पखवारे का आयोजन 15 सितंबर से किया जा रहा है, जिसमें विशेष अभियान चलाकर पात्रों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक करने का काम शुरू कर दिया गया है।
- डॉ. मुकुल त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम समन्वयक
योजना के तहत चयनित अस्पतालों में मरीजों का इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है। जो भी मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनका नियमानुसार इलाज हो रहा है।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ