मेडिकल कॉलेज में पर्चा काउंटर पर उमड़ी भीड़।
अंबेडकरनगर। इलाज की उम्मीद लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे मरीजों के लिए अब सबसे पहली चुनौती है आभा आईडी बनवाना। सरकार की मंशा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बढ़ावा देने की है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रक्रिया ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर घंटों की लंबी कतारें, तकनीकी अड़चनें और स्टाफ की कमी के चलते बीमार लोग इलाज से पहले ही थक जाते हैं।
मंगलवार को ओपीडी काउंटरों पर हालात ऐसे दिखे मानो मरीजों को इलाज नहीं, बल्कि इम्तिहान देना हो। जिन मरीजों के पास आभा आईडी नहीं थी, उन्हें पहले टोकन काउंटर भेजा गया। फिर परचा बनवाने के लिए दूसरी कतार में लगाया गया। दोनों काउंटरों पर स्टाफ की कमी और स्पष्ट संकेतक न लगे होने का अभाव ऐसा था कि लोग बार-बार एक ही बात पूछते हुए इधर-उधर भटकते नजर आए। काउंटरों पर बैठने वाले कर्मचारियों की निष्क्रियता और समय पर मार्गदर्शन न मिलने से कुछ मरीजों ने गुस्से और हताशा में परचा बनवाने की कोशिश ही छोड़ दी। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दूरदराज से आने वाले लोग व्यवस्था को कोसते हुए परेशान दिखाई दिए। टोकन काउंटर पर बार-बार कर्मचारी के कहीं जाने के कारण कतार लंबी होती चली गई।
काउंटर पर अफरा-तफरी, टोकन व्यवस्था फेल
महरुआ के पहितीपुर निवासी नीता मंगलवार को खुद का इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि परचा काउंटर पर पहुंचने पर उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले टोकन लेकर आइए। जब वे टोकन काउंटर पर पहुंचे, तो वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। आधा घंटा तक इंतजार करने के बाद टोकन मिल पाया, इसके बाद परचा बनवाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी गांव की आरती देवी ने बताया कि मोबाइल लेकर आने के बावजूद उनका आभा आईडी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया। परचा काउंटर पर कर्मी ने स्पष्ट कहा कि बिना टोकन के परचा नहीं बनेगा। टोकन काउंटर पर कोई मौजूद नहीं था और उन्हें काफी देर इंतजार करना पड़ा। अकबरपुर के पट्टी कमालपुर निवासी पंकज ने बताया कि उन्हें भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। पंकज ने कहा कि यह व्यवस्था मरीजों की सुविधा के लिए है, लेकिन इसे और सरल और व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता है। टांडा के बरवा बिठलपुर निवासी रमापति वर्मा ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक होने के बावजूद उन्हें टोकन काउंटर और परचा काउंटर के बीच चक्कर लगाने पड़े। कोई सहायक कर्मी उपलब्ध न होने से परचा बनवाने में ही घंटों लग गए।
आभा आईडी के लिए दो काउंटर बनवाए गए हैं। काउंटर नंबर पांच पर मोबाइल न होने, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। अगर किसी मरीज का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है तो सीएमएस या प्राचार्य कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हर मरीज को इलाज मुहैया कराना हमारी प्राथमिकता है। -डॉ. अमित कुमार पटेल, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज