अंबेडकरनगर। कोहरे के साथ तापमान गिरने से फसलों पर पाला की मार पड़ रही है। इससे फूल वाली सब्जी व पत्तेवाली फसलों को खासा नुकसान हो रहा है। खासकर आलू की फसल में पाला रोग लग रहा है। मौसम की बेरुखी से फसलों के नुकसान देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
जिले में कोहरे के साथ ही तापमान में गिरावट आने व कड़ाके की सर्दी बढ़ने से फूल वाली लाही सरसों आदि की फसलों को खासा नुकसान हो रहा है। मटर, टमाटर, बैगन, गोभी, धनिया आदि फसलें भी प्रभावित होने लगी हैं। पत्तेवाली फसलों में छेदक कीटों का प्रकोप शुरू होने से किसान चिंतित हैं। जिले में इस बार 5500 हेक्टेयर में आलू की फसल बोई गई है। लगभग सवा लाख क्विंटल आलू का उत्पादन प्रति वर्ष होता है। कोहरे की वजह से पाला रोग से आलू की फसल प्रभावित है।
अकबरपुर, जलालपुर और टांडा ब्लाॅक क्षेत्र में आलू की फसल को ज्यादा क्षति हुई है। पाला रोग में पौधे की पत्तियां सिकुड़ कर सूखने लगती हैं। इससे आलू का उत्पादन कम हो जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डाॅ. रामजीत बताते हैं कि आलू के पौधों में यह रोग लगने से पत्तियां काली पड़ने के साथ ही सूखने लगती हैं। भियांव गांव के किसान दिवाकर वर्मा बताते हैं कि शाम को पौधों की पत्तियां ठीक थी। सुबह खेत में पहुंचने पर कई पौधे रोग से खराब दिखाई दिए। इससे वह चिंतित हैं।
इस तरह करें बचाव
जिला उद्यान अधिकारी धर्मेद्र चौधरी ने बताया कि 400-500 मिलीलीटर रिडोमिल दवा को 600-800 लीटर पानी मेंं घोल बनाकर आलू की फसल में छिड़काव करें। रोग का प्रभाव कम न होने पर 15 दिन के अंतराल में भी दवा का छिड़काव करें। इसके अलावा मेटालैक्सिल दवा का भी इसी मात्रा मेंं छिड़काव करें। इससे आलू की फसल में पाला रोग का असर कम होगा।