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भूमि विवादों को लेकर अक्सर होते झगड़े, निपटारे की सुध नहीं

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अंबेडकरनगर। जिले में भूमि विवाद को लेकर पकड़ी भोजपुर में हुई युवक की हत्या व उपद्रव का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र में गत वर्ष दो सगे भाइयों की हत्या कर दी गई थी। इन बड़े मामलों के अलावा अक्सर भूमि संबंधी विवाद को लेकर गांवों में लाठियां चटकती रहती हैं।
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अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आए दिन ग्रामीणों के मारपीट में घायल होने का सिलसिला भी देखने को मिलता है। इन सबके बावजूद जमीनी धरातल पर भूमि संबंधी विवादों को रोकने के लिए तहसील व ग्रामस्तर पर तैनात अधिकारी व कर्मचारी आमतौर पर अपनी भूमिका के साथ न्याय करते नहीं दिखते। कारण यह कि अक्सर भूमि संबंधी विवादों में ग्रामीणों का यह आरोप सामने आता रहता है कि पैमाइश करने में अव्वल तो आदेशों के बाद भी आनाकानी की जाती है। इसके बाद यदि पैमाइश की भी गई, तो अक्सर किसी न किसी पक्ष के प्रभाव में आकर न्याय को ताक पर रख दिया जाता है। ग्रामीणों के इस आरोप में दम इसलिए भी दिखता है, क्योंकि इन्हीं सबको लेकर अक्सर ग्रामीणों के बीच सिर फुटव्वल की नौबत बनी रहती है।
जानकारों का कहना है कि यदि तहसील स्तरीय अधिकारियों की ओर से प्रत्येक सप्ताह प्राथमिकता के साथ मामलों का स्थायी समाधान मौके पर जाकर सुनिश्चित कराया जाए, तो भूमि संबंधी विवादों को लेकर कानून व्यवस्था का जो संकट खड़ा होता रहता है, उससे छुटकारा पाया जा सकता है। यहां ग्रामीणों का आरोप पुलिस कर्मियों पर भी अक्सर लगता रहता है। कारण यह कि कई बार बिना राजस्व अधिकारियों के आदेश के ही पुलिस कर्मियों का हस्तक्षेप विवाद को कम करने की बजाय बढ़ा देता है। अमर उजाला ने मंगलवार को भूमि विवाद से जुड़े मामलों को लेकर कई ग्रामीणों से बात की, तो उनका दर्द कुछ इस तरह से सामने आया।
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आठ वर्ष में नहीं निपटा भूमि विवाद
उसरहवा पेखरवा गांव निवासी अरविंद कुमार ने कहा कि उसकी खतौनी की भूमि का बंटवारे का विवाद लगभग आठ वर्ष से चल रहा है। इसके लिए उसने न सिर्फ सीएम पोर्टल, बल्कि डीएम, एसपी के साथ ही संपूर्ण व थाना समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई। इन सबके बावजूद अब तक उनकी समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है।
45 बार की शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
विपक्षियों की ओर से रास्ता अवरुद्ध कर दिए जाने की शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह कहना है कि जलालपुर कोतवाली क्षेत्र के छाछू मोहल्ला निवासी गिरीश का। उसका कहना है कि वह अब तक लगभग 45 बार संपूर्ण समाधान दिवस के साथ ही थाना समाधान दिवस में शिकायत दर्ज करा चुका है। जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका है।
जबरन खोल लिया रास्ता, कार्रवाई सिफर
गौहन्ना गांव निवासी मनीराम ने कहा कि उसकी खतौनी की भूमि की तरफ विपक्षियों ने दरवाजा खोल रखा है। जब इसका विरोध किया जाता है, तो संबंधित की ओर से धमकी दी जाती है। संपूर्ण समाधान दिवस के साथ ही थाना समाधान दिवस में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक इस तरफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
जोत लिया चकरोड़, नहीं मिला न्याय
इस्माइलपुर दुक्खर गांव निवासी रामकेवल बीते तीन वर्ष से न्याय की आस लगाए बैठे हुए हैं। विपक्षियों ने खेत का चकरोड जोत लिया है। इसे लेकर जब भी वह पैमाइश कराने का प्रयास करते हैं, तो विपक्षियों की ओर से इसका विरोध किया जाता है। सीएम पोर्टल से लेकर संपूर्ण समाधान दिवस में इसे लेकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका है।
खेत तक जाने को नहीं मिल रहा रास्ता
मदनगढ़ प्रतापपुर चमुर्खा निवासी रामनायक वर्मा ने कहा कि उसके खेत के चकरोड को विपक्षियों ने जोत लिया है। एक वर्ष पहले विपक्षियों की ओर से चकरोड जोतने के बाद से वह न्याय के लिए जिम्मेदारों के कार्यालय का चक्कर लगा रहा है, लेकिन सभी मौन साधे हुए हैं। यहां तक की पैमाइश तक नहीं कराई जा रही है। नतीजा यह है कि उसके खेत तक जाने का रास्ता नहीं रह गया है।
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