अंबेडकरनगर। जिले के लगभग चार लाख किसानों के लिए खुशखबरी है। तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के निर्णय का लाभ इन किसानों को मिलना है। कई किसानों ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का निर्णय लाभदायक साबित होगा। हालांकि असल जरूरत तभी पूरी होगी, जब एमएसपी पर कानून लागू किया जाएगा। किसानों का कहना है कि जरूरी सुविधाएं काश्तकारों को प्राथमिकता के साथ मुहैया कराई जाएं।
तीन कृषि कानूनों के पास होने के बाद से ही उसे लेकर लगातार चले आ रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संदेश में यह कहकर बड़ी राहत दी कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का निर्णय लिया गया है। यह खबर मिलते ही जिले के किसानों में भी खुशी का माहौल देखने को मिला। जिले में लगभग चार लाख किसान हैं। केंद्र सरकार के इस निर्णय ने ऐसे ज्यादातर किसानों के बीच खुशी का माहौल उत्पन्न कर दिया है।
किसानों का मानना है कि तीनों कृषि कानून वापस लेने का फायदा अब काश्तकारों को मिल सकेगा। किसानों का यह भी कहना था कि तमाम तरह की आशंकाएं अब छंट गई हैं। किसानों के बीच कृषि कानूनों को लेकर जो अनिश्चितता का माहौल था, उससे छुटकारा मिला है। किसानों ने आमतौर पर कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का जहां स्वागत किया, वहीं कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून लागू करना चाहिए। एमएसपी पर कानून लागू करने से ही किसानों का असली भला हो सकेगा। केंद्र सरकार को इस मांग की तरफ जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए।
किसानों ने की सरकार की निर्णय की सराहना
कटरिया सम्मनपुर के किसान रामजीत ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना सुखद है। इसका लाभ किसानों को मिलेगा। सरकार को अविलंब एमएसपी पर कानून की घोषणा करनी चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना किसानों का असली हक है। बरधाभिउरा के किसान प्रदीप वर्मा ने कहा कि सरकार का निर्णय सराहनीय है। किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए सरकारी मशीनरी को और सक्रियता से काम करना चाहिए। आदमपुर तिंदौली के रामशौक ने कहा कि किसानों के मामले में कोई भी निर्णय प्राथमिकता के साथ लिया जाना चाहिए। सरकार ने कानून वापस लेकर किसानों को राहत दी है। इसी तरह आगे भी निर्णय लिए जाने की जरूरत है। रघुनाथपुर के महेंद्र ने कहा कि किसान आंदोलन लंबे समय तक चला। सरकार ने विचार के बाद जो निर्णय लिया है, उसका विधिवत लाभ किसानों को मिलना सुनिश्चित कराया जाए। एमएसपी पर भी कानून बनाया जाए। कई अन्य किसानों ने कृषि कानून को वापस लिए जाने के निर्णय की सराहना की।
एमएसपी लागू करने की जरूरत
भाकियू अराजनीतिक टिकैत गुट के मंडल उपाध्यक्ष रणजीत उर्फ लल्लू ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने की घोषणा सराहनीय है, लेकिन अभी पूरी तरह से भरोसा नहीं है कि वापस ले ही लिया जाएगा। जब तक संसद सत्र में विशेष बिल लाकर इन कानूनों को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। एमएसपी लागू किए जाने की जरूरत है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष हजारी बाबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के हक में फैसला लिया है। इस फैसले के अच्छे परिणाम सामने आएंगे। सरकार को चाहिए कि किसानों के बीच अपने निर्णय का समुचित प्रचार-प्रसार कराया जाए। किसानों के बीच जो आशंकाएं हैं, उन्हें दूर कराया जाए।
किसान आंदोलन की हुई जीत
कृषि कानूनों को वापस लिए जाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। सपा विधायक सुभाष राय व पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने कृषि कानूनों को वापस लिए जाने को किसानों व आम जनता की जीत बताया। कहा कि एक वर्ष तक कभी किसानों को खालिस्तानी, तो कभी परजीवी बता कर अपमानित किया गया। अब चुनाव नजदीक देख कानूनों को वापस लेने की पलटी मारने के बावजूद केंद्र व भाजपा सरकार को कोई फायदा होने वाला नहीं है। अभी तो एमएसपी का कानून लागू करने समेत किसानों के बिजली के बिल तथा डीजल तथा पेट्रोल के दाम में कमी करने पर भी घोषणा करनी होगी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमित कुमार वर्मा, युवा जिलाध्यक्ष विशाल वर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष सै. मेराजुद्दीन किछौछवी ने कहा कि यह तानाशाही की हार है। किसानों के आंदोलन की जीत हुई है। सरकार को एमएसपी गारंटी कानून लागू करने के साथ ही रसोई गैस सिलेंडर तथा पेट्रोल व डीजल के दाम में की गई बढ़ोत्तरी को भी वापस लेना होगा। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी ने कहा कि किसानों के हक में सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश पर्व के मौके पर किसानों को बड़ा तोहफा दिए जाने का काम किया है। इसके व्यापक परिणाम सामने आएंगे। वरिष्ठ भाजपा नेता रमाशंकर सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने देशभर के किसानों का दिल जीतने का काम किया है। पूरे देश के किसान पीएम के इस निर्णय से खुश है।