किछौछा (अंबेडकरनगर)। पूर्व मंत्री सैयद अली अशरफ (80) का मंगलवार को लंबी बीमारी के चलते लखनऊ में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से समर्थकों व परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार देर शाम उनका पार्थिव शरीर पैतृक आवास दरगाह किछौछा शरीफ लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। बुधवार रात उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में हजारों लोगों ने शिरकत की और उन्हें अंतिम विदाई दी।
सैयद अली अशरफ को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता था। उन्होंने जनता दल पार्टी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे साफ-सुथरी छवि और प्रभावशाली व्यक्तित्व के नेता के रूप में जाने जाते थे। उनका राजनीतिक सफर 1980 में कांग्रेस के साथ शुरू हुआ था। कांग्रेस ने उन्हें स्पेशल कोटा से एमएलसी बनाया था। 1984 के आम चुनाव में सैयद अली अशरफ कांग्रेस के टिकट पर पीलीभीत विधान सभा सीट से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। इसके बाद 1989 में जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने तब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उनकी राजनीतिक यात्रा उल्लेखनीय रही और उन्होंने विभिन्न पदों पर रहकर जनसेवा की।
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सूफी संत के वंशज थे पूर्व मंत्री
रुहानी इलाज के लिए दुनिया भर में मशहूर सूफी संत सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी की दरगाह से पूर्व मंत्री का गहरा नाता था। सूफी संत के वंशज सैयद मुख्तार अशरफ के पुत्र सैयद अली अशरफ की पहचान क्षेत्र में तमाम धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए भी रही है। इनके परिवार में एक पुत्र सैयद सलमान अशरफ और उनका परिवार है, जिनके साथ वह लखनऊ में रह रहे थे।
बड़े नेताओं की गैर मौजूदगी चर्चा में
अंतिम सफर में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बड़े नेता नजर नहीं आए। यह गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। सैयद अली अशरफ लंबे समय तक समाजवादी व कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे। हालांकि कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से शोक जरूर जताया है।