पूर्व विधायक गोपीनाथ वर्मा के निधन के बाद इल्तिफातगंज के सहजौरा घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान
विद्युतनगर/केदारनगर। टांडा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय नेता, पूर्व विधायक और दर्जा प्राप्त मंत्री रहे गोपीनाथ वर्मा (84) का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन के समाचार से पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को ही इल्तिफतगंज के सहजौरा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। तहसीलदार टांडा, निखिलेश चौधरी के नेतृत्व में पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके पश्चात उनके पुत्र विजय वर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी।
गोपीनाथ वर्मा अपनी सरलता और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। उन्होंने 1980 में पहली बार लोकदल के टिकट पर टांडा सीट से जीत दर्ज की। उस समय उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को मात्र 52 वोटों के अंतर से हराया था, जो आज भी क्षेत्र की राजनीति में चर्चित है। उन्होंने 1988 के उपचुनाव में दोबारा जीत हासिल कर विधानसभा में वापसी की। जनता दल के टिकट पर वह तीसरी बार 1989 में विधायक चुने गए और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह एक लोकतंत्र सेनानी भी थे। लगभग छह माह पूर्व ही उनकी पत्नी लखपति देवी का निधन हुआ था।
अंतिम संस्कार में सांसद लाल जी वर्मा, राम शिरोमणि वर्मा, विधायक राममूर्ति वर्मा, राम अचल राजभर, जिला पंचायत अध्यक्ष साधू वर्मा, बसपा नेता दिलीप कुमार विमल, सपा जिलाध्यक्ष जंग बहादुर यादव, भाजपा नेता कपिल देव वर्मा और शिक्षक नेता आसाराम वर्मा आदि मौजूद रहे।
इंदिरा गांधी को दिखाया था काला झंडा
गोपीनाथ वर्मा का राजनीतिक जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने टांडा थर्मल पावर प्रोजेक्ट का नाम संजय गांधी के नाम पर रखने का विरोध किया था। इस दौरान इंदिरा गांधी को काला झंडा दिखाने पर पुलिस ने उनकी बर्बरता से पिटाई की थी और उन्हें जेल भी भेजा गया था। अपने राजनीतिक सफर में वह कुछ समय अपना दल में भी रहे, लेकिन मुलायम सिंह यादव से उनकी विशेष निकटता रही।
मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्हें उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के सक्रिय सदस्य थे।