दहेज के लिए विवाहिता को प्रताड़ित करने व दहेज में पांच लाख रुपए मांगने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट सबीहा खातून ने पति समेत पांच लोगों को सजा सुनाई है। तीन अभियुक्तों को दो-दो वर्ष की सश्रम सजा के साथ पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। दो अन्य अभियुक्तों के विरुद्घ 500-500 रुपए का जुर्माना लगाया है।
कहा कि जुर्माने की राशि न अदा करने पर अभियुक्तों को सात दिन का साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। जलालपुर थाना क्षेत्र के मरहरा गांव निवासी मोहम्मद सरवर ने वर्ष 2012 में जलालपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
बताया कि उसने अपनी पुत्री सहाना मलिक की शादी 26 दिसंबर 2010 को आजमगढ़ जिले के सरैना गांव निवासी अब्दुल रहमान पुत्र अब्दुल्लाह के साथ की थी। मांग के अनुरूप विवाह में दान दहेज भी दिया। इसके बावजूद उसकी पुत्री को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। दहेज के रूप में उस पर पांच लाख रुपए लाने का दबाव ससुराल पक्ष से बनाया जा रहा है।
उसकी तहरीर पर जलालपुर थाने में पति अब्दुल रहमान, सास रेहाना, ससुर अब्दुल्लाह, देवर उस्मान, ननद शगुफता, फरहा, जैनब, शबनम, शबीना व नंदोई नईम के विरुद्घ पुलिस ने दहेज उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कर ली। मामले का न्यायिक मजिस्ट्रेट सबीहा खातून ने अध्ययन किया।
इसके बाद घटना के दोषी पांच लोगों को सजा सुनाई। उन्होंने धारा 498 ए के तहत पति अब्दुल रहमान, अब्दुला व रेहाना को दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
कहा कि जुर्माना न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा धारा 323 व 504 में पति अब्दुल रहमान, शगुफता व फरहा पर 500-500 रुपए का जुर्माना लगाया। कहा कि जुर्माना अदा न करने पर सात दिन का कारावास भुगतना होगा।