जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पूरे दिन शॉर्टसर्किट से गेहूं के खेतों में आग लगती रही। इन घटनाओं में 52 बीघा से अधिक गेहूं की फसल राख हो गई। जिससे लगभग 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सूचना के बावजूद अग्निशमन कर्मियों के समय पर नहीं पहुंचने से कई स्थानों पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।
राजेसुल्तानपुर प्रतिनिधि के अनुसार जहांगीरगंज थाना अंतर्गत सिंहपुर गांव में नरेंद्र दुबे के खेत के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन के तार आपस में टकराने से गिरी चिन्गारी से खेत में आग लग गई। गांव के लोग आग बुझाने में जुट गए मगर तेज हवा चलने के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था।
देखते ही देखते लपटों ने आसपास के कई खेतों को चपेट में ले लिया। लगभग आधे घंटे बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने ग्रामीणों की मदद से करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। मगर तब तक नरेंद्र की नौ बीघा, दीप नारायण की चार बीघा, मेवाराम दुबे की एक बीघा, सेवाराम दुबे की चार बीघा, रामआसरे की दो बीघा, सुधाकर दुबे की सवा दो बीघा, राधेश्याम की चार बीघा, कविमुनि की एक बीघा, हरिकेश यादव की चार बीघा और अनिल सिंह की तीन बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई।
सीओ कमल सिंह, तहसीलदार राजकुमार व पूर्व विधायक त्रिवेणीराम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
जहांगीरगंज प्रतिनिधि के अनुसार पूरनपुर गांव में रविवार दोपहर विद्युत तार में शॉर्टसर्किट से निकली चिन्गारी से गांव निवासी रामशबद चौबे के खेत में आग लग गई। जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक एक बीघा गेहूं की फसल जल गई।
जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार मालीपुर थाना अंतर्गत सल्लाहपुर गांव में ओमप्रकाश दुबे की डेढ़ बीघा, सम्मनपुर थाना क्षेत्र के सितारा में बेचनराम का एक बीघा व जैतपुर थाना के मखदूमपुर में राधेश्याम की दो बीघा गेहूं की फसल शॉर्टसर्किट से लगी आग में राख हो गई। इन तीनों स्थानों पर सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझाई।
अकबरपुर के गौसपुर गांव निवासी आत्माराम के गेहूं के खेत में रविवार दोपहर विद्युत तार के शॉर्टसर्किट से निकली चिन्गारी से आग लग गई। जब तक ग्रामीण आग बुझाते, तब तक डेढ़ बीघा गेहूं की फसल जलकर राख हो गई।
बसखारी प्रतिनिधि के अनुसार रविवार दोपहर बीबीपुर गांव निवासी राजकरन के खेत के ऊपर से गुजरे तार में शॉर्टसर्किट से निकली चिन्गारी से गेहूं की फसल में आग लग गई। जब तक आग पर काबू पाया जाता, तब तक राजकरन की तीन बीघा, जयराम वर्मा की तीन बीघा, पंकज चौधरी की दो बीघा, जियालाल व हीरालाल की एक-एक बीघा व पारस चौधरी की पांच बिस्वा गेहूं की फसल राख हो गई।