टांडा/विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। सरकार हमें आंदोलनजीवी कहती है। इसका जवाब किसान वोट की चोट देकर देंगे। जब उन्हें वोट की चोट लगेगी, तब जाकर किसानों के दर्द का एहसास होगा। देश की संसद व विधानसभाओं में सत्ता पक्ष के गुलामों की फौज है। 109 दिन से किसान आंदोलित हैं, लेकिन सत्ता पक्ष के किसी नेता में यह हिम्मत नहीं है कि वह किसानों के पक्ष में कुछ बोल दे या किसानों के बीच चल जाएं। इसी धरती पर जन्मे डॉ. राममनोहर लोहिया ने केरल में किसानों पर लाठीचार्ज होने पर अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा था कि जब सड़कें सुनसान हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी। किसान जब राजधानी जाता है तो उसके लिए कील, कांटे, लाठी, डंडे बिछा दिए जाते हैं। किसानों को केंद्र सरकार बर्बाद करने में जुटी है। किसान व नौजवान इसका जवाब दें और तीनों कृषि कानूनों को समाप्त करने की लड़ाई में अपना योगदान दें।
उक्त विचार राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी जयंत ने सोमवार को टांडा के इनामीपुर बाग में आयोजित किसान महापंचायत में व्यक्त किए। जयंत ने कहा कि किसान आशावादी होता है, रोज हारता है और फिर दूसरे दिन हिम्मत से जुट जाता है। किसानों को केंद्र सरकार बर्बाद करने पर जुटी है। एमएसपी की गारंटी सरकार नहीं दे रही है। प्रधानमंत्री झूठ पर झूठ बोल रहे हैं। जनता व किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रहे हैं। जनता बताए कि किसकी आय दोगुनी हुई।
जयंत ने कहा कि आय यदि बढ़ रही है, तो वह सिर्फ पीएम के मित्र मंडली की। पूरे विश्व में सबसे अधिक आय अडानी व अंबानी की बढ़ी है। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने पूरे देश में एक जाति बनाई, वह जाति किसान थी। उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि योगी और मोदी किसान व मजदूर विरोधी हैं। बेरोजगारी के मुद्दे पर कहा कि योगी बार-बार झूठ बोलते हैं।
पंचायत को संबोधित करने से पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने बसपा के संस्थापक कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा कि उन्होंने दबे, कुचले, शोषित समाज की लड़ाई में अपना विशेष योगदान दिया। राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा किसान तब तक लड़ेगा, जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं हो जाते। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद ने कहा कि मोदी को किसानों की तरक्की नहीं देखी जा रही है।
महापंचायत को लेकर प्रशासन के रवैये को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया। कहा कि रामसिंगार वर्मा के बाग में आयोजित यह महापंचायत काफी जद्दोजहद के बाद हो रही है। रामसिंगार को रात में 12 बजे घर से उठाकर दबाव बनाया गया कि वह अपने बाग में महापंचायत न होने दें, लेकिन वे अडिग रहे। राष्ट्रीय सचिव शिवकरन सिंह, अनुपमा मिश्रा, युवा लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ महमूद व जिलाध्यक्ष वासुदेव वर्मा के अलावा सपा के जिलाध्यक्ष रामशकल यादव, पूर्व मंत्री गोपीनाथ वर्मा, पूर्व एमएलसी विशाल वर्मा ने भी सभा को संबोधित किया। इस मौके पर मुस्सब अजीम, फिरोज सिद्दीकी, मुजीब सोनू, अजीज अशरफ व यहिया अशरफ के अलावा सरदार सेना प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रेश वर्मा आदि मौजूद रहे।
किसान आंदोलन को नई हवा दे गई महापंचायत
यूं तो कृषि कानून को लेकर जिले में अलग-अलग राजनीतिक व सामाजिक संगठनों द्वारा छिटपुट आंदोलन लगातार किया जा रहा है, लेकिन राष्ट्रीय नेता के तौर पर पहुंचे जयंत चौधरी ने इस आंदोलन को जिले में नई ऊर्जा प्रदान कर दी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संबंधित स्थल पर न सिर्फ महापंचायत हुई, वरन बड़ी तादाद में किसान भी पहुंचे। किसानों ने महापंचायत को लेकर एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कृषि कानूनों की वापसी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प भी लिया। किसानों की एकजुटता देख कार्यक्रम में पहुंचे राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी गदगद नजर आए।