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काम ठप पर कागजों में दिखाया खर्च

Sat, 31 Oct 2015 10:23 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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अक्तूबर माह तक न सिर्फ लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित कर दिए गए, बल्कि लक्ष्य से अधिक धन भी व्यय कर दिया गया। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर माह तक 11 लाख चार हजार 270 मानव दिवस सृजित होने थे, लेकिन 19 अक्तूबर तक 12 लाख 57 हजार 715 मानव दिवस सृजित कर दिए गए।
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इसी प्रकार अक्तूबर माह के अंत तक 29 करोड़ 63 लाख 63 हजार 982 रुपये व्यय किए जाने थे, लेकिन 19 अक्तूबर तक 32 करोड़ 95 लाख 50 हजार रुपये खर्च कर दिए गए।

जिले में मनरेगा को लेकर पूरी तरह मनमानी का माहौल है। कभी योजना के तहत धन उपलब्ध होने के बाद भी कार्य न कराए जाने का मामला प्रकाश में आता है, तो कभी मनरेगा मजदूरों को कार्य के बाद भी भुगतान न किए जाने का। इसे लेकर तमाम शिकायतें आए दिन सामने आती रहती हैं, लेकिन इनके निस्तारण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 में योजना के तहत जिले को 51 करोड़ 59 लाख 77 हजार रुपये का लक्ष्य मिला है। साथ ही 19 लाख 23 हजार मानव दिवस सृजित किए जाने हैं। अक्तूबर तक न सिर्फ 11 लाख चार हजार 270 मानव दिवस का सृजन किया जाना था, बल्कि 29 करोड़ 63 लाख 63 हजार रुपये व्यय का लक्ष्य था।

पंचायत चुनाव के चलते जिले की 786 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 400 से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य या तो ठप रहे या फिर अत्यंत धीमी गति से चले। इन सबके बावजूद विभागीय आंकड़ों में 19 अक्तूबर तक 12 लाख 57 हजार 715 मानव दिवस सृजित कर दिए गए, जो कि लक्ष्य से एक लाख 53 हजार 445 अधिक है।

इसी प्रकार 19 अक्तूबर तक 32 करोड़ 95 लाख 50 हजार रुपये खर्च कर दिए गए, जो कि लक्ष्य से तीन करोड़ 31 लाख 87 हजार अधिक है। लक्ष्य से अधिक मानव दिवस सृजित किए जाने व लक्ष्य से अधिक धनराशि खर्च किए जाने को लेकर सवालिया निशान लग रहे हैं।
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