इस बार केंद्र व्यवस्थापकों को परीक्षा शुरू होने के 20 मिनट बाद ही केंद्र पर उपस्थित व अनुपस्थित छात्रों की संख्या इंटरनेट के माध्यम से यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को देनी होगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी 181 केंद्र व्यवस्थापकों को सिमकार्ड भी उपलब्ध उपलब्ध करा दिए हैं।
ऐसे में जिनके पास साधारण फोन थे, उन्हें न चाहते हुए भी एंड्रॉयड मोबाइल खरीदना पडेगा। विभाग की इस पहल से जहां कई केंद्र व्यवस्थापकों को अतिरिक्त खर्च करना पडेगा वहीं कई ऐसे भी हैं जिन्हें स्मार्ट फोन के संचालन की कोई जानकारी ही नहीं है।
बोर्ड परीक्षा में धांधली को रोकने को लेकर बोर्ड ने इस बार और अधिक संजीदा कदम उठाया है। कई बार उपस्थिति को लेकर सवालिया निशान लगते रहे हैं। इसमें केंद्र व्यवस्थापकों व परीक्षा में लगे कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप भी लगता रहा है।
ऐसे में अब संबंधित परीक्षा केन्द्रों पर बनाए गए भी इस बार परीक्षा शुरू होने के 20 मिनट बाद भी बोर्ड को इंटरनेट के माध्यम से केन्द्र पर छात्रों की कुल संख्या तथा उपस्थित व अनुपस्थित छात्रों की संख्या देनी होगी। इसके लिए विभाग की तरफ से जिले के सभी 181 परीक्षा केन्द्रों के केंद्र व्यवस्थापकों सिमकार्ड भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।
खास बात यह है कि ज्यादातर को इंटरनेट चलाने या फिर एंड्रॉयड मोबाइल चलाने की जानकारी नहीं है। अब केंद्र व्यवस्थापकों के सामने ऐसे मोबाइल सेट खरीदने की मजबूरी खड़ी कर दी गई है। कई केंद्र व्यवस्थापक इस नई पहल को लेकर डीआईओएस कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
उनका कहना है कि उन्हें पद से हटा दिया जाए या कोई सहायक दिया जाए जो इंटरनेट के माध्यम से बोर्ड को सूचनाएं दे सके। विभाग शिकायतों को संज्ञान में लेने की बजाए मौन साधे हुए है। मंगलवार को इस परेशानी से जूझ रहे द्वारिका प्रसाद इंटर कॉलेज बेनीपुर के केंद्राध्यक्ष अवधेश कुमार तिवारी डीआईओएस कार्यालय पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि उन्हें यह मोबाइल व इंटरनेट चलाने के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। ऐसे में वह बोर्ड को सूचना कैसे दे पाएंगे। खरीदी गई एंड्रायड मोबाइल को दिखाते हुए बताया कि यह खर्च भी उन्हें मजबूर होकर करना पड़ा है।