आडीटोरियम का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है, इंडोर में वार्डों का निर्माण तो पूरा हो गया है, लेकिन उसी के निकट अन्य कार्य होते रहने से व्यवधान उत्पन्न होता रहता है। निर्माण में सुस्त रवैये ने न सिर्फ मरीजों व तीमारदारों वरन चिकित्सकों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं।
गौरतलब है कि जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज की सौगात पूर्ववर्ती बसपा सरकार ने दी थी। इर्दगिर्द के अन्य जनपदों में जब ऐसे कॉलेज नहीं हैं, तब यहां मेडिकल कॉलेज की घोषणा से जनपदवासियों समेत इर्दगिर्द के जनपदों के मरीजों व तीमारदारों में नई उम्मीद जागी थी। वर्ष 2007 में इस राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ था।
निर्माण यूं तो वर्ष 2010 में पूरा हो जाना था, लेकिन राजकीय निर्माण निगम व शासन के सुस्त रवैये के चलते निर्माण में लगातार व्यवधान उत्पन्न होता रहा। बाद में एक वर्ष की अवधि और बढ़ाई गई, लेकिन तब भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया। लगभग 4 अरब की यह परियोजना अभी भी उपेक्षा की शिकार है।
यहां आधे अधूरे निर्माण के बीच पहले आउटडोर, फिर इंडोर की सुविधा तो शुरू कर दी गई, लेकिन अभी भी मेडिकल कालेज की ख्याति के अनुरूप यहां मरीजों व तीमारदारों को पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसमें एक बड़ा कारण आधा अधूरा निर्माण भी है, जिसके चलते न तो कई आवश्यक मशीनें यहां आ पा रही हैं और न ही कई चिकित्सकों के पद भरे जा सके हैं।