अंबेडकरनगर। रंगदारी, आपराधिक धमकी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में मुंबई जेल में बंद आरोपी जफर सुपारी उर्फ खान जफर की एक और जमानत याचिका सत्र न्यायालय ने सोमवार को खारिज कर दी। सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने पाया कि जमानत प्रार्थनापत्र के समर्थन में लगाया गया पैरोकार का शपथपत्र फर्जी है। इसकी पुष्टि स्वयं पैरोकार ने कोर्ट में पेश होकर की है। लगातार दो मामले सामने आने के बाद अब कोर्ट ने इस मामले में शपथपत्र के समय वीडियोग्राफी भी कराने के आदेश दिए हैं।
हंसवर क्षेत्र के चकदाऊदपुर निवासी उजैर अहमद ने एक मई 2024 को पुलिस को दी तहरीर में बताया था था कि सऊदी से लौटने के बाद एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर स्वयं को जफर सुपारी का आदमी बताते हुए रंगदारी मांगी थी। डर के कारण उसने कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में अलग-अलग तारीखों में 2.95 लाख रुपये भेज दिए थे। इस मामले में पुलिस ने माफिया खान मुबारक के बड़े भाई जफर सुपारी व अन्य अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।
इस मामले में अधिवक्ता की ओर से कथित पैरोकार मुजीब खान निवासी नसीराबाद की तरफ से दूसरी जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान मुजीब ने कोर्ट के सामने पेश होकर शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। उसने बताया कि फर्जी शपथपत्र तैयार किया गया है। इस आधार पर सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार की अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इससे पूर्व पिछले शुक्रवार को भी ग्राम रसूलपुर खासपुर निवासी नेबूलाल जफर सुपारी की जमानत अर्जी में पैरोकार और शपथकर्ता झूठा बनाए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद कोर्ट ने याचिका तकनीकी आधार पर खारिज कर दी थी।