उफनाई सरयू का जलस्तर गिरने के बावजूद पास के गांव के लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। नदी के किनारे आबाद आलापुर व टांडा क्षेत्र के आठ गांवों के निवासी कटान के खतरे से दहशत में हैं। नदी का पानी सोमवार को 17 सेंमी और कम हुआ। इसके बावजूद सरयू खतरे के निशान से 52 सेंमी ऊपर ही बह रही है। इस बीच जलस्तर में कमी से माझा क्षेत्र के गांवों में विषैले जंतुओं का भी खतरा पैदा हो गया है। संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
टांडा इलाके में सरयू नदी के जलस्तर में तीन दिनों से गिरावट दर्ज की जा रही है। रविवार को पानी खतरे के निशान से 69 सेंमी ऊपर था जिसमें सोमवार को 17 सेमी की कमी हुई। पानी अब भी खतरे के निशान से 52 सेंमी ऊपर है। बीते दिनों नदी का पानी खतरे से 99 सेमी ऊपर पहुंच गया था। जलस्तर में कमीं से जहां प्रभावित लोगों को कुछ राहत महसूस हुई वहीं कटान की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
माझा उलटहवा, माझा इस्माइलपुर बेलदहां, माझा करमपुर बरसावां, माझा छज्जापुर, माझा अवसानपुर, माझा आसोपुर आदि गांव में हालात को देखते हुए कभी भी कटान होने का खतरा बढ़ गया है। कटान की आशंका को देखते हुए ग्रामीण दहशत में हैं।
राजेसुल्तानपुर क्षेत्र में नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही माझा कम्हरिया व चांड़ीपुर गांव में भी कटान का खतरा बढ़ गई है।
इससे क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं। अराजी देवारा, हंसू का पूरा, कल्लू का पूरा, सन्यनरायन का पूरा, सिद्धनाथ, पटपरवा समेत आधा दर्जन गांवों से बाढ़ का पानी दूर होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। प्रमुख मार्गों से बाढ़ का पानी हटने से आवागमन की समस्या दूर हुई है।
बाढ़ का पानी कम होने से नगरीय व माझा क्षेत्र में मच्छरों व विषैले कीड़े अचानक बढ़ गए हैं। इससे संक्रामक रोग फैलने की भी आशंका बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि अब तक क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं किया गया है। आराजी देवारा व कल्लू का पूरा आदि गांवों के लोगों ने तुरंत जरूरी दवा के छिड़काव की मांग की है।