अंबेडकरनगर। इल्म एक ऐसी पूंजी है, जिसे जितना अधिक खर्च किया जाए, उसमें उतनी ही वृद्धि होगी। संस्कार युक्त शिक्षा हासिल करने वाला कभी भी जिंदगी में असफल नहीं होता है। संस्कार व शिक्षा एक दूसरे के पूरक हैं। इनमें से यदि एक की भी कमी रह जाती है तो जीवन में सफलता मुश्किल हो जाती है। यह विचार शाम मौलाना बकी जाफरी ने व्यक्त किए। वह लोरपुर में आयोजित एक मजलिस को खिताब कर रहे थे।
उन्होंने सभी से अपील की कि बच्चों को बेहतर तालीम देने के साथ ही अच्छे संस्कार भी जरूर दें। वकार मेंहदी रिजवी मरहूम की याद में मेंहदी इमाम बारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना बकी ने कहा कि एक सफल जिंदगी के लिए बेहतर शिक्षा व बेहतर संस्कार होना जरूरी है। इंसान बेहतर शिक्षा हासिल करने के बाद भी अच्छे संस्कार न होने के कारण ही सदैव परेशान बना रहता है। एक शायर ने कहा भी है कि तालीम खारदार है, गर तरबियत न हो। मतलब है कि तालीम कांटों भरा ताज है, यदि अच्छे संस्कार न हों। ऐसे में हम सभी को चाहिए कि अपने बच्चों को बेहतर दुनियावी तालीम देने के साथ साथ दीनी तालीम भी दें।
मौलाना ने बाद में कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। आयोजक डा. सै. हैदर मेंहदी ने बाद में सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मजलिस के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया गया। इस दौरान मौलाना शब्बर, मौलाना शारिब, मौलाना इंतेजार मेहदी, अहमद मेंहदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।