ज्ञापन के माध्यम से मेडिकल स्टोर संचालकों ने दवा की ऑनलाइन बिक्री के लिए चल रही कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोके जाने की मांग की है। कहा कि यह मेडिकल स्टोर संचालकों पर अनावश्यक दबाव है।
इससे न सिर्फ देश के आठ लाख मेडिकल स्टोर संचालक प्रभावित होंगे, बल्कि इससे जुड़े करीब 40 लाख कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित होगी। दवा व्यवसाय के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। इस बीच राष्ट्रव्यापी आह्वान के बावजूद जिले में बंदी का कोई खास असर नहीं रहा।
जिलाध्यक्ष राहुल उपाध्याय व महामंत्री लालचन्द्र पांडेय ने बुधवार को डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में मेडिकल संचालकों व उससे जुड़े लोगों के हितों के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोके जाने की मांग की। कहा कि सरकार की मंशा है कि देश में दवाओं की बिक्री ऑनलाइन हो। साथ ही दवा के क्षेत्र में विदेशी धन का भी निवेश हो।
सरकार की इस मंशा से दवा से जुड़े देश के लोगों का अहित होगा। ऑनलाइन दवा की बिक्री से न सिर्फ नशाखोरी तेजी से बढ़ेगा, बल्कि बड़ी संख्या में बेरोजगारी भी फैलेगी। इस व्यवस्था से जहां देश के करीब आठ लाख दवा व्यापारियों का अहित होगा, वहीं करीब 40 लाख लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी।
कहा कि यदि सरकार ने मनमानी की तो मेडिकल स्टोर संचालक इसके विरोध में लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि फुटकर दवा विक्रेताओं के यहां फार्मासिस्ट की अनिवार्यता खत्म की जाए। ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट में किसी भी तरह का संशोधन करने से पहले देश के ग्रामीण भारत के दवा व्यवसाइयों के हितों का ध्यान रखा जाए।
सरकार द्वारा किए जा रहे नए पहल के विरोध में बुधवार को जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में इक्का-दुक्का दुकानें ही बंद रहीं। कारण यह कि अधिकांश दुकानदारों ने दो दिन पहले ही निर्णय ले लिया था कि चुनाव के दौरान जनहित को देखते हुए दुकानें खुली रखी जाएगी।