निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भ्रूण जांच रोकने को लेकर जिले में पूरी तरह लापरवाही बरती जा रही है। कागजी तौर पर तीन सरकारी सेंटरों समेत कुल 24 अल्ट्रासाउंड सेंटर ही पंजीकृत हैं, जबकि 15 से अधिक अवैध ढंग से अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन धड़ल्ले से जिले में चल रहा है।
ऐसे सेंटरों समेत निजी नर्सिंगहोम पर न सिर्फ भ्रूण की जांच की जाती है, बल्कि अप्रशिक्षित लोगों द्वारा अवैध ढंग से गर्भपात भी कराया जाता है। अवैध ढंग से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कार्रवाई को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 के बाद से किसी प्रकार का अभियान ही नहीं चल सका है। वर्ष 2011 में मात्र एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कार्रवाई की गई थी।
कन्या भ्रूण हत्या को लेकर भले ही शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा हो या फिर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हों, लेकिन जिले में इसका किसी प्रकार का पालन होता नहीं दिख रहा। जिले में बगैर रजिस्ट्रेशन के 15 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर व 20 से अधिक निजी नर्सिंगहोम का संचालन हो रहा है।
ऐसे सेंटरों पर न सिर्फ भ्रूण की जांच की जाती है, बल्कि गर्भपात भी कराया जाता है। ऐसा करने से कई बार प्रतिकूल परिस्थितियां भी उत्पन्न होती रहती हैं। शिकायतें अक्सर ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटरों व नर्सिंगहोम की संबंधित अधिकारियों से होती रहती है, लेकिन जांच व कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जाती है।
अवैध ढंग से संचालित अल्ट्रासाउंड व नर्सिंगहोम सेंटरों पर कार्रवाई को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 के बाद से किसी प्रकार का अभियान ही नहीं चल सका। वर्ष 2011 में बसखारी बाजार में अवैध ढंग से संचालित प्रकाश डायग्नोस्टिक सेंटर बसखारी पर ही कार्रवाई हुई थी।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 24 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। इनमें तीन सरकारी, जिसमें जिला अस्पताल, राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर व सीएचसी टांडा शामिल हैं, जबकि 21 निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। इसके अलावा 110 निजी क्लीनिंग व नर्सिंगहोम रजिस्टर्ड हैं।
अब जबकि शासन ने भ्रूण की जांच व कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए मुखबिर योजना चलाए जाने की घोषणा की है, तो इसका कितना इस पर असर पड़ेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।