अंबेडकरनगर के ताजपुर में आयोजित मजलिस में भाग लेते लोग।
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इंसान को दौलत, शोहरत व अपने जिस्म पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए। ऐसे लोग जिनमें गुरूर होता है, उन पर अल्लाह के फरिश्ते लानत भेजते हैं। इंसान को अपनी जिंदगी में कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उनकी आने वाली पीढ़ी को कोई परेशानी हो।
अल्लाह ने कहा है कि मां-बाप के कर्मों का फल उनके बच्चों को भुगतना पड़ता है। ये बातें शनिवार को अकबरपुर नगर से सटे ताजपुर स्थित रौज-ए-हजरत इमाम हुसैन पर हुई मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना वसी हसन खां फैजाबादी ने कही।
अंजुमन हैदरिया ताजपुर के तत्वावधान में लगी मजलिस में मौलाना वसी ने कहा कि गुरूर बादशाह सिकंदर को भी था। उसे अपनी ताकत व दौलत पर घमंड था। जब मौत उसके करीब आई तो उसने वसीयत किया कि जनाजा उठने के दौरान उसके दोनों हाथ कफन के बाहर निकाल दिए जाएं जिससे लोगों को यह समझ में आए कि हम खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाएंगे।
जिन हकीमों ने उसका इलाज किया, वही उसका जनाजा उठाएं ताकि उन्हें यह मालूम हो कि वह भी मौत से बच नहीं सकते। इसके अलावा जो दौलत उसने कमाई है, उसे जनाजे के रास्ते में बिछा दिया जाए जिससे यह जानकारी हो कि दौलत भी इंसान को बचा नहीं सकती।
मौलाना ने कहा कि अपनी औलादों का ईमानदारी से कमाई गई दौलत से पालन-पोषण करो। इससे न सिर्फ बच्चे पाक दामन होंगे बल्कि तरक्की उनके कदम चूमेगी। बाद में मौलाना ने करबला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को गमगीन बना दिया।
सामाजिक संस्था अल इमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन ख्वाजा शफाअत हुसैन ने मजलिस में आए सभी लोगों का आभार जताया। इस दौरान ख्वाजा दबीर हुसैन, अली अस्करी नकवी, हाजी मेहंदी रजा, मोहसिन खान, रेहान खान व साबिर हुसैन आदि मौजूद रहे।