अंबेडकरनगर में स्कूलों के निरीक्षण के दौरान इस तरह अध्यापक की भूमिका में दिखे डीएम।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। गोद लिए परिषदीय विद्यालयों के दौरे पर सोमवार को डीएम सैमुअल पॉल एन पहुंचे तो शिक्षक की भूमिका में आ गए। कभी बोर्ड पर मार्कर के माध्यम से तो कभी किताबों से सवाल पूछकर वे छात्र-छात्राओं को पढ़ाते दिखे। डीएम ने उच्च प्राथमिक विद्यालय अलावलपुर व प्राथमिक विद्यालय मुरादपुर के औचक निरीक्षण में विभिन्न अव्यवस्थाओं के लिए फटकार लगाई। कुछ छात्र-छात्राओं की ओर से बेहतर प्रदर्शन पर पीठ थपथपाई, लेकिन कई बच्चों का प्रदर्शन संतोषजनक न पाए जाने पर प्रधानाध्यापक व शिक्षकों को कड़ी हिदायत दी। डीएम ने यह भी कहा कि वे किसी भी प्राथमिक स्कूल का औचक निरीक्षण ऐसे ही करेंगे। इसमें बच्चों की पढ़ाई के बारे में अनिवार्य तौर पर पूछताछ होगी। बच्चों की पढ़ाई कमजोर मिली तो शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाएगी।
बीते दिनों ही शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी समेत 73 जिलास्तरीय अधिकारियों ने दो-दो परिषदीय विद्यालयों को गोद लिया था। डीएम ने उच्च प्राथमिक विद्यालय अलावलपुर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय पसियापारा को गोद लिया था। इस बीच शिक्षा गुणवत्ता को परखने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी अचानक उच्च प्राथमिक विद्यालय अलावलपुर पहुंच गए। वहां उन्होंने बालिका शौचालय में ताला बंद पाया। इस पर उन्होंने प्रधानाध्यापक को फटकार लगाते हुए कहा कि जब विद्यालय खुला है, तो फिर शौचालय में ताला क्यों बंद है। वे कक्षा सात में पहुंचे। शिक्षिका पूनम वर्मा पढ़ा रही थीं। डीएम ने बच्चों से किताब पढ़ने को कहा।
कुछ ने तो ठीक से पढ़ा, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी सामने आए, जो किताब ठीक ढंग से नहीं पढ़ सके। इसके बाद दीवार पर लगे चित्रों के बारे में डीएम ने स्वयं जानकारी दी। इसके बाद डीएम कक्षा आठ के क्लास में पहुंचे। बोर्ड पर लिखे विज्ञान विषय के चिन्हों के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही कक्ष में लगे चित्रों के बारे में पूछा, तो कुछ बच्चे ही सही जानकारी नहीं दे सके। डीएम ने प्रधानाध्यापक को निर्देशित किया कि वे स्वयं प्रत्येक क्लास रूम में जाकर बच्चों को चित्रों के बारे में समझाएं।
डीएम ने प्राथमिक विद्यालय मुरादपुर पहुंचकर जायजा लिया, तो वहां शिक्षण कार्य संतोषजनक पाया। इस पर उन्होंने शिक्षकों की सराहना की। साथ ही बच्चों से अधिक से अधिक लेखन कार्य भी कराएं। दोनों विद्यालयों के निरीक्षण में डीएम शिक्षक की भूमिका में दिखे। डीएम ने न सिर्फ बोर्ड पर लिखने के लिए मार्कर संभाला वरन डस्टर का भी प्रयोग कई बार किया। डीएम ने बच्चों को अलग-अलग विषयों के बारे में बोर्ड पर जानकारी दी तो उनसे सवाल जवाब भी किए। बच्चों की किताबें लेकर उनसे कई प्रश्न पूछे।