अंबेडकरनगर। भगवान राम के 14 वर्ष वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाने वाला दीप पर्व रविवार को समूचे जिले में श्रद्धा व उल्लास के साथ मना। रविवार सुबह से ही घरों में पूजन अर्चन के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। शाम होने के साथ ही घरों में माता लक्ष्मी व भगवान गणेश की पूजा शुरू हो गई। इसके बाद जगह जगह दीप सजाए गए। रंग बिरंगी झालरों से सजे घर लोगों को बरबस ही अपनी तरफ आकर्षिक कर रहे थे। अंधेरा छाने के साथ ही आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया।
बच्चे हों या बड़े सभी इसमें शामिल हुए, और जमकर लुत्फ भी उठाया। आतिशबाजी का दौर देर रात तक चलता रहा। अकबरपुर नगर के अलावा विभिन्न शहरी क्षेत्रों में निर्धारित स्थानों पर आतिशबाजी देखने के लिए भी लोगों की भीड़ जुटी। कहीं पर कोई हताहत न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा। दीपपर्व पर जिले से कहीं कोई अप्रिय घटना भी सामने नहीं आयी।
दीपावली में रविवार को सबसे पहले घरों में विशेष स्थान तैयार कर भगवान गणेश व माता लक्ष्मी की पूजा हुई। घरों हो या प्रतिष्ठान सभी जगह इस परंपरा का निर्वाह हुआ। इसके बाद लोगों ने दीप व मोमबत्तियों से घरों को सजाया। रंग बिरंगी झालरों से सजे घर बरबस ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षिक कर रहे थे। अकबरपुर नगर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों तथा शहजादपुर में युवाओं ने देर रात तक आतिशबाजी कर दीप पर्व का खूब लुत्फ उठाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने घरों में पूजन करने के उपरांत मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की। पूजन अर्चन के लिए नगर के तहसील तिराहा स्थित हनुमान मंदिर, गायत्री मंदिर, शहजादपुर रामजानकी मंदिर व शिवालय स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजन-अर्चन किया। भगवान से घर परिवार की बेहतरी की दुआ मांगी।
टांडा प्रतिनिधि के अनुसार अमावस्या की स्याह रात में मिट्टी के दीये व बिजली के रंग बिरंगी झालरों से पूरा नगर जगमगा उठा। कालिमा से मुक्ति के लिये लोगों ने समृद्धि की देवी लक्ष्मी और विवेक के देवता गणेश का पूजन किया। दीपोत्सव पर चांदी, पीतल के गणेश लक्ष्मी के अलावा मिट्टी से निर्मित प्रतिमाएं खूब बिके। शाम होने के साथ ही वातावरण पटाखों की ध्वनि से गूंजने लगा। इसके साथ दीपोत्सव के पूजन की तैयारी शुरू हो गयी। घरों एवं प्रतिष्ठानों में विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना हुई।
साधकों ने महालक्ष्मी की विशेष पूजा रात्रि में की। नगर के ज्योतिर्विद आचार्य पंडित राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि समृद्धि के लिए बुद्धि का शुद्ध होना आवश्यक है। बुद्धि में विकार आने से व्यक्ति और समाज की समृद्धि नष्ट हो जाती है। इसलिये बुद्धि के शुद्धि के लिये गणेश जी महाराज की पूजा की जाती है। बताया कि महालक्ष्मी का प्रगटीकरण सुर और असुरों के संयुक्त प्रयास से समुद्र मंथन के बाद हुआ था।
महालक्ष्मी की कृपा सबको चाहिये। इसी कारण दुखी और दरिद्र से लेकर सपत्तिवान तक सभी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि लक्ष्मी के आगमन के लिये घरों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में रात भर उजाला किया जाता है। आलापुर, बसखरी, जहांगीरगंज, जलालपुर, भीटी व महरुआ आदि क्षेत्रों में भी दीप पर्व उल्लास व श्रद्घा के साथ मना।
दीपावली पर विध्न विनाशक और रिद्धि सिद्धि के स्वामी गणेश तथा वैभव की देवी महालक्ष्मी की घर घर उपासना के साथ ही पूजा पंडालों में भी आराधना हुई। लोगों ने विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना करके सुख और सम्पति का वर मांगा। शाम होते ही घर, मंदिर व व्यावसायिक प्रतिष्ठान रोशनी की झिलमिल छटा से नहा उठे। घरों, दूकानों, मंदिरों की व्यापक सफाई व पोताई के बाद पूजा स्थल पर गणेश गौरी, कलश, नव ग्रह आदि की स्थापना कर के एक आसन पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित किया गया।
पूजा वेदी तैयार करने के बाद शास्त्र सम्मत ढंग से पूजा कर आरती की गयी। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम 14 वर्ष के बनवास के बाद कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या को अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में लोगों ने असंख्य दीप जलाए थे। तभी से दीपावली पर्व की परम्परा शुरू है। लोगों ने दीपोत्सव पर घर का कोना कोना प्रकाशित करने के साथ भवनों व प्रतिष्ठानों पर भव्य सजावट की। इसके अलावा पूजा पंडालों में सजे भगवान गणेश व माता लक्ष्मी की आराधना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी
दीप पर्व के मद्देनजर पुलिस प्रशासन सख्त व मुस्तैद नजर आया। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार मिश्र जहां सभी सीओ से आवश्यक फीडबैक ले रहे थे। वहीं सभी पांचों तहसीलों के सीओ व थानाध्यक्ष अपने अपने क्षेत्रों में गश्त करते रहे। देर रात तक पुलिस टीम चौकस नजर आयी। कड़े सुरक्षा प्रबंधों की वजह से ही जिले में दीप पर्व के मौके पर कहीं से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं आयी।