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डीएम ने पकड़ा अधिशाषी अधिकारी का झूठ, दर्ज होगा केस

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अंबेडकरनगर। अकबरपुर नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी सुरेश मौर्य के विरुद्घ डीएम राकेश कुमार मिश्र ने अकबरपुर कोतवाली में केस दर्ज करने तथा वेतन रोकने का निर्देश दिया है। अधिशाषी अधिकारी पर संवेदनशील मामलों में गलत जानकारी देने तथा जिम्मेदारियों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतने का आरोप है।
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अकबरपुर नगर पालिका में तैनात अधिशाषी अधिकारी सुरेश मौर्य की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से नागरिकों में आक्रोश है। तमाम समस्याओं के बावजूद उसके निदान की न तो वे सुध लेते हैं और न ही मौके पर पहुंचने की जरूरत महसूस करते।
बीते दिनों अमर उजाला ने उनकी इसी कार्यशैली को प्रमुखता से उजागर किया था, जिसका नागरिकों ने स्वागत भी किया। इस बीच अधिशाषी अधिकारी की इन सब करतूतों की जानकारी डीएम तक पहुंची। डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए उन पर कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया।
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अब डीएम ने पाया कि अधिशाषी अधिकारी द्वारा संवेदनशील मामलों में भी गलत जानकारी दी जा रही है। इसे लेकर डीएम ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही शुक्रवार को डीएम ने अधिशाषी अधिकारी सुरेश कुमार मौर्य के विरुद्घ केस दर्ज का निर्देश कोतवाली पुलिस को दिया। साथ ही उनका वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया।
दरअसल डीएम राकेश कुमार मिश्र शुक्रवार को अकबरपुर नगर के मिर्जापुर गो-संरक्षण केंद्र पहुंचे, तो वहां चारा पानी एवं छाया के पर्याप्त प्रबंध नहीं थे, जबकि बीते दिनों ही उन्हें चारे के पर्याप्त इंतजाम के लिए व्यक्तिगत तौर पर कहा गया था। डीएम ने यह भी पाया कि पवित्र शिवबाबा के निकट तथा अकबरपुर नगर के विभिन्न क्षेत्रों में पशुओं के खुलेआम घूमने पर ईओ को निर्देशित किया गया था।
उन्होंने बताया था कि ऐसे आठ पशुओं को गो संरक्षण केंद्र भेज दिया गया है। शुक्रवार को केंद्र का दौरा करने पर पता चला कि पिछले कई दिनों से वहां कोई नया पशु नहीं लाया गया है। दूरभाष पर जब ईओ से डीएम ने जानकारी चाही, तो एक बार फिर से गलत जवाब देते हुए कहा कि पशुओं को गो संरक्षण केंद्र न रहकर बाहर भिजवा दिया गया है।
डीएम ने शासन के शीर्ष प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में झूठी सूचना देने, लापरवाही, शिथिलता, अनियमितता व अनुशासनहीनता बरते जाने का उल्लेख करते हुए एडीएम को निर्देशित किया कि पशु अत्याचार अधिनियम के तहत ईओ पर अविलंब केस दर्ज कराया जाए। साथ ही वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण तलब किया जाए।
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