जिला अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को बेड तक आक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था बीमार पड़ी है। आक्सीजन प्लांट खराब होने से जैसे तैसे मरीजों को कभी पाइप लाइन तो कभी सिलेंडर के माध्यम से आक्सीजन दी जाती है। दो माह से प्लांट को ठीक नहीं कराया जा सका है। यह प्लांट कभी भी पूरी तरह ठप पड़ सकता है।
इन हालात में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज जैसे हालात यहां जिला अस्पताल में भी पैदा हो सकते हैं। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में गत दिनों आक्सीजन की कमी के चलते कई बच्चों की मौत हो गई। गोरखपुर जैसी लापरवाही जिले के सरकारी अस्पताल में भी है। यहां बेड पर मरीजों को पाइप लाइन के सहारे आक्सीजन पहुंचाए की व्यवस्था बीमार पड़ी है।
अस्पताल के वार्ड एक, इमरजेंसी के तीन वार्ड व आपरेशन कक्ष में बेड तक आक्सीजन पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। तीन माह से इन वार्डों में पाइप लाइन के सहारे आक्सीजन पहुंचाने का सिस्टम बाधित है। बताया जाता है कि आक्सीजन प्लांट को चालू करने पर ही बेड तक आक्सीजन पहुंचती है।
प्लांट के बंद होते ही आक्सीजन का पहुंचना ठप हो जाता है। आमतौर पर मरीजों को सिलेंडर द्वारा आक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। मरीजों को आक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए 16 सिलेंडर मौजूद हैं। इनमें भी दो खाली पड़े हैं। 14 सिलेंडर में आक्सीजन है।
वार्ड एक में भर्ती जमुनीपुर के शीतला प्रसाद, बेवाना की सोनरा देवी व टांडा की जफरनिशा कहती हैं कि पाइप के सहारे तो आक्सीजन उपलब्ध कराते हुए नहीं देखा। जरूरत पड़ने पर मरीज को सिलेंडर से आक्सीजन दी जाती है।