उफनाई सरयू नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 44 सेंमी ऊपर पहुंच गया। इससे छह गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। यह गांव चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। इससे लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस बीच टांडा व आलापुर तहसील इलाके में करीब साढ़े तीन सौ बीघा फसल जलमगभन होने से माझा क्षेत्र के गावों में पशुओं के चारे का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर जाने को लेकर चिंतित हैं वहीं पशुओं के चारे की व्यवस्था करने में उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। थिरुआ नाले के उफान से भी सात गांव तक पानी पहुंच गया है।
सरयू नदी का जलस्तर से खतरा बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को जलस्तर खतरे के निशान से 39 सेंमी ऊपर तो शुक्रवार को यह 92.165 मीटर तक पहुंच गया जो कि खतरे के निशान से 44 सेंमी ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से माझा उलटहवा के बाबूराम का पुरवा, जालिम का पुरवा, केवटहिया समेत आधा दर्जन गांव जलमगभन हो गए।
इन गांवों के लोग आवागमन के लिए नाव का प्रयोग कर रहे हैं क्योंकि नदी का पानी चारों तरफ से आबादी में घुस चुका है। नदी से जुड़े थिरुआ नाले में बाढ़ का पानी चढ़ने से ग्राम रसूलपुर, पैकोलिया, चौथइया, गौरागूजर, बेलहरी, बसावनपुर व पिपरी मोहम्मदी में बाढ़ का पानी घुस गया। इसके अलावा निकटवर्ती अवसानपुर, आसोपुर, इस्माइलपुर बेलदहिया, माझा छज्जापुर, माझा मुबारकपुर समेत एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं।
बाढ़ का पानी माझा कम्हरिया के कल्लू का पूरा, बद्री का पूरा, सत्यनरायन का पूरा, निषाद बस्ती, अराजी देवारा, सिद्धनाथ, हंसू का पूरा व प्रसाद का पूरा, पटपरवा के निकट पहुंच गया है। उधर जलस्तर बढ़ने से टांडा तहसील क्षेत्र में 200 और आलापुर क्षेत्र में 150 बीघा धान व गन्ने की फसल जलमगभन हो गई। इससे पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित गांवों के लोग अपने परिवार को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ पशुओं के चारे को लेकर भी परेशान हैं।