जिला अस्पताल में आरक्षित किया गया वार्ड।
अंबेडकरनगर। पुणे में कई लोगों को प्रभावित कर चुकी नई तरह की बीमारी जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से मुकाबले को लेकर जिला अस्पताल तैयार है। इससे मौत के एक या अधिक मामले सामने आने के बाद यहां भी बीमारी से निपटने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए जिला अस्पताल में आठ बेड का जीवनरक्षक सुविधाओं से युक्त वार्ड आरक्षित कर लिया गया है। हालांकि चिकित्सकों ने इस बीमारी से किसी भी बड़े खतरे से इन्कार करते हुए कहा कि लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है।
घबराएं नहीं जांच कराएं : जिला अस्पताल के फिजीशियन डाॅ. योगेश वर्मा ने बताया कि जीबीएस वायरस सबसे पहले पैरों पर असर डालते हैं। इनमें झुनझुनी, सुन्नपन व कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। बाद में यह वायरस सिर तक फैल जाता है। मांसपेशियों में कमजोरी के कारण लकवा के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसके बाद यह ऊपर के अंगों की ओर बढ़ता है और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इससे प्रभावित होने का खतरा ज्यादा होता है।
कोई केस नहीं, फिर भी सतर्कता पूरी
सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार आमतौर पर प्रभावित रोगियों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। इन्हें अन्य रोगियों से अलग रखा जाना चाहिए। इससे प्रभावित लोगों को ठीक होने में अलग-अलग समय लग सकता है। इलाज के लिए आईवीआईजी इंजेक्शन की सिफारिश की जाती है। हालांकि, कितने इंजेक्शन लगने हैं, यह रोगी की स्थिति पर निर्भर करता है। इसके वायरस के बारे में चिकित्सक और अधिक जानकारी जुटा रहे हैं।
बीमारी के लक्षण
सांस लेने में कठिनाई, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी, सुई जैसी चुभन, बोलने या भोजन निगलने में कठिनाई, पक्षाघात प्रमुख लक्षण हैं। बचाव के लिए पानी उबालकर पीएं। ताजा भोजन करें। सब्जियों या फलों को बिना धुले न खाएं। बच्चों व बुजुर्गों को संक्रमण से बचाएं। बाहर निकलें तो अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाएं।