फोटो-18, अंबेडकरनगर जिला अस्पताल परिसर में नहीं हो पा रहा है लावारिस व्यक्तियों का इलाज व देखरेख।
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अंबेडकरनगर। लावारिस मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जिला अस्पताल प्रबंधन को कोई सुध नहीं है। ऐसे मरीजों का न तो बेहतर उपचार किया जा रहा और न ही देखरेख की तरफ ध्यान दिया जा रहा। नतीजा यह रहा कि सोमवार को एक लावारिस वृद्ध महिला जहां अस्पताल परिसर के क्षय रोग विभाग स्थित कूड़ेदान के निकट अचेतावस्था में पड़ी रही तो वहीं एक वृद्ध गंदगी में लिपटा बेड पर दिखा। यह दृश्य देख वहां मौजूद मरीज व तीमारदार भी अस्पताल की व्यवस्था व चिकित्सकों आदि को कोसते नजर आए।
सरकार भले ही मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा व इलाज देने के लिए आये दिन तमाम तरह के दिशा निर्देश जारी करती रहती है, वहीं ऐसे आदेश का जिम्मेदारों पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। मरीजों के साथ अक्सर संवेदनहीनता सामने आती रहती है। जिला अस्पताल परिसर में सोमवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां लावारिस वार्ड में भर्ती एक महिला देखरेख के अभाव में वार्ड से बाहर पहुंच गई। वार्ड से निकलकर वह अस्पताल परिसर के क्षय रोग विभाग भवन तक पहुंच गई।
इसके बाद स्थित कूड़ेदान के निकट अचेतावस्था में सोमवार पूर्वान्ह पड़ी मिली। किसी कर्मचारी या चिकित्सक को यह देखने की सुध नहीं रही कि उसे वहां से हटाकर निर्धारित बेड तक पहुंचाया जा सके। इसी लापरवाही व संवेदनहीनता के बीच एक वृद्ध लावारिस वार्ड स्थित बेड पर गंदगी में भर्ती किया दिखा। लावारिस मरीजों के प्रति इस लापरवाही को देखकर जिला अस्पताल पहुंचे अन्य मरीजों के तीमारदारों ने आक्रोश भी जताया।
वार्ड एक में भर्ती मरीज के तीमारदार पंकज ने कहा कि जिला अस्पताल में मरीजों के हितों को लेकर अक्सर इसी तरह की लापरवाही देखने को मिलती है। कभी मरीजों की देखभाल नहीं की जाती तो कभी गंभीर किस्म के मरीजों को भर्ती करने की बजाए जान बूझकर रेफर कर दिया जाता है।
एक अन्य तीमारदार राधेश्याम यादव का कहना था कि ऐसी लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी व चिकित्सक की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उधर, सीएमएस एसके गौतम ने कहा कि सभी तरह के मरीजों का पूरी तरह ध्यान रखा जाता है। इस तरह की पुनरावृत्ति न हो यह सुनिश्चित किया जाएगा। वार्डों में नियमित साफ-सफाई हो रही है।