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Ambedkar Nagar News: डिजिटल क्रॉप सर्वे आज से, पहली बार होगा एआई का प्रयोग

Sun, 04 Jan 2026 10:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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अंबेडकरनगर। रबी फसलों के डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए आज से एक नई पहल शुरू हो रही है, जिसमें पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत अंबेडकरनगर जिले में 11 लाख 20 हजार गाटों का सर्वे किया जाएगा। यह कदम सर्वे में पारदर्शिता लाने और किसानों की फसल का सही विवरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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एआई के उपयोग से पारदर्शिता और सटीकता आएगी। एप का उपयोग यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों की फसल का विवरण तभी पोर्टल पर अपलोड किया जा सके जब एआई उसे स्वीकार करे। यदि विवरण एआई द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है, तो वह निरस्त हो जाएगा। इससे सर्वे में धांधली की संभावना कम होगी। मोबाइल पर लॉगिन करने से पहले, सर्वेयर के चेहरे की पहचान ऐप द्वारा की जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि सर्वेयर मौके पर मौजूद है और स्वयं सर्वे कर रहा है। यह प्रक्रिया खेत से अधिकतम 20 मीटर की दूरी तक ही पूरी की जा सकेगी। यदि सर्वेयर किसी अन्य स्थान पर बैठकर पहले से खींची गई फोटो से फोटो बनाकर अपलोड करने का प्रयास करता है, तो वह निरस्त हो जाएगा। इस बार के सर्वे में एक नई सुविधा जोड़ी गई है, जिसके तहत उन खेतों का भी विवरण अपलोड किया जाएगा जहां फसल कट चुकी है। इसमें यह भी दर्ज किया जाएगा कि खेत में कौन सी फसल बोई गई थी। यह सुविधा पिछले सर्वे के ऑनलाइन प्रारूप में उपलब्ध नहीं थी। इस डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए 650 सर्वेयरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक सर्वेयर अधिकतम तीन हजार गाटों का सर्वे कर सकेगा। उपकृषि निदेशक डॉ. अश्विनी सिंह ने बताया कि सर्वेयरों की संख्या अभी और बढ़ाई जाएगी। पिछले साल 1400 सर्वेयर लगाए गए थे, और इस बार भी लगभग उतने ही सर्वेयरों को नियुक्त किए जाने की संभावना है।
दो बार करना होगा लाॅगिन
सर्वेयरों को दो बार लॉगिन करना होगा। पहली बार, गाटे के सर्वे के दौरान उन्हें आधार और ईमेल आईडी का प्रमाणीकरण कराना होगा। इसके बाद, 20 से 30 गाटों के सर्वे के बाद, उन्हें दोबारा आईडी प्रमाणीकरण से गुजरना होगा। यह प्रक्रिया सर्वेयरों की पहचान सुनिश्चित करने और डेटा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यदि किसी कार्मिक का स्थानांतरण होता है, तो उन्हें मोबाइल बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल तहसील का कोड बदल दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहेगी।
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