अंबेडकरनगर। अकबरपुर के शहजादपुर पुराने चौक मैदान में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक सर्वेश्वर शरण ने मनुष्य के जीवन में पाप-पुण्य, कर्म और उनके फल को लेकर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने बताया कि मनुष्य के प्रत्येक कर्म का फल उसे इसी धरती पर भोगना पड़ता है। मनुष्य अपने जीवन में जो भी पाप या पुण्य करता है, उसका परिणाम किसी और लोक में नहीं, बल्कि इसी संसार में सामने आता है। जब व्यक्ति अपने कर्मों का फल भोगता है, तभी उसे यह अनुभूति होती है कि उसने जीवन में किस प्रकार के कार्य किए हैं और उनके परिणाम कितने प्रभावशाली हैं। संसार में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य जीवन की त्रिवेणी हैं। इन तीनों का संतुलन ही मनुष्य को सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
भक्ति से आस्था मजबूत होती है, ज्ञान से विवेक जागृत होता है और वैराग्य से जीवन में संतुलन बना रहता है। इन तीनों के बिना मनुष्य जीवन के उद्देश्य को समझ नहीं पाता। कर्म का फल टलता नहीं है और न ही किसी अन्य समय पर स्थानांतरित होता है।
कृष्ण भक्ति से व्यक्ति जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है। जीवन में आने वाली परेशानियां और संकट स्थायी नहीं होते। भक्ति मनुष्य को मानसिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है, जिससे वह हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखता है। कृष्ण भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने कर्मों को सुधारने और जीवन को सही दिशा में ले जाने का साहस प्राप्त करता है। इस दौरान महेंद्र, मनोज, अभिषेक व अन्य उपस्थित रहे।