अंबेडकरनगर। शारदीय नवरात्र की भक्तिमयी बेला में जिलेभर के देवी मंदिरों में आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। चौथे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कर शक्ति, संयम, शौर्य और आत्मिक ज्ञान की कामना की।
सुबह भोर से ही मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप की सुगंध और गूंजते जयकारों के बीच मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। अकबरपुर के पुराने तहसील तिराहा स्थित गायत्री मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। मां कूष्मांडा के चरणों में श्रद्धालुओं ने अक्षत, सुमन व प्रसाद अर्पित कर मानसिक शक्ति और विवेक की याचना की। आरती के समय पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया।
ग्रामीण अंचलों में भी दिखा उल्लास
टांडा, जलालपुर, महरुआ, भीटी, आलापुर, कटेहरी और बसखारी सहित दर्जनों कस्बों और गांवों में स्थित मंदिरों में दिनभर पूजन, हवन और झांकी दर्शन का क्रम चलता रहा। भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत संगीतमय कीर्तनों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। वहीं मंदिरों व पंडालों में जगमगाती रोशनी और मां के भव्य श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।
झांकियों और अनुशासन ने खींचा ध्यान
जमुनीपुर, श्रवण क्षेत्र, महरुआ और जलालपुर समेत ग्रामीण अंचलों में भक्तों ने पंडालों में माता की विभिन्न झांकियां सजाईं। हर स्वरूप के साथ जुड़ी कथा और विधि से श्रद्धालु गहराई से जुड़े नजर आए। स्थानीय श्रद्धालुओं ने बताया कि नवरात्र का प्रत्येक दिन न केवल पूजा का अवसर होता है, बल्कि यह आत्मानुशासन, संयम और आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा भी देता है।