अकबरपुर के कसेरुआ में मधुमक्खी पालन करने वाले किसान दयाराम।
अंबेडकरनगर। अकबरपुर ब्लॉक के कबीरपुर कसेरूआ निवासी प्रगतिशील किसान दयाराम गौड़ परंपरागत खेती छोड़ शहद उत्पादन कर आर्थिक उन्नति कर रहे हैं। वह जो शहद उत्पादित कर रहे हैं, उससे कई परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के मिड-डे मील में मिठास घुल रही है। यही नहीं, उनके उत्पादित शहद की बरेली, मेरठ और अमेठी, सुल्तानपुर की निजी कंपनियों में भी मांग है। इससे इनको अच्छी खासी आमदनी भी हो रही है। खुद के साथ 25 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
मिड-डे मील में परोसा जा रहा शहद
दयाराम का उत्पादित शहद भीटी, भियांव और टांडा ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों के मिड-डे मील में परोसा जा रहा है। शहद में एंटी इंफ्लेमेटरी (जो शरीर में सूजन और जलन को कम करती हैं) गुण पाए जाते हैं। शहद खांसी को शांत करने में भी मदद करता है। इसके अलावा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर शहद दिल की सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में मिड-डे मील में परोसा जा रहा शहद बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा उन्हें निरोगी बना रहा है। हर माह दो क्विंटल शहद की सप्लाई इन स्कूलों में हो रही है।
10 डिब्बे से की शुरुआत, 800 के पहुंचा पार
दयाराम बताते हैं कि वर्ष 2009 में उन्होंने 10 डिब्बों से मधुमक्खी पालन के सफर की शुरुआत की थी, जो धीरे-धीरे बढ़कर आज 800 डिब्बों तक पहुंच गया है। इनका कहना है कि किसान अपने खेतों व बागों में फसलों के साथ ही मधुमक्खी का बॉक्स रख सकते हैं। इससे फसल उत्पादन के साथ ही शहद उत्पादन कर दोहरा लाभ कमाया जा सकता है।
कृषि विभाग लिखेगा सफलता की कहानी
उपकृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि दयाराम प्रगतिशील किसान है। विभाग इनकी प्रगति की कहानी का प्रकाशन कर अन्य किसानों को इसे पढ़ाएगा, ताकि और किसान भी मुधमक्खी पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकें।