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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में सामानों के आपूर्ति के नाम पर खेल

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अंबेडकरनगर। आपको शायद यकीन न हो, लेकिन यह सच है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में एक कार्यदायी संस्था 12 रुपये में 20 लीटर क्षमता की बाल्टी की आपूर्ति करने को तैयार है। एक अन्य संस्था ने हालांकि इसी क्षमता वाली बाल्टी को 70 रुपये में देने की निविदा डाली है। यह बात अलग है कि दोनों ही संस्थाएं बहुचर्चित गोंडा जिले से जुड़ी हुई हैं।
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उधर खाद्यान्न आपूर्ति के नाम पर भी मामला कम दिलचस्प नहीं है। एक संस्था 400 रुपये प्रति किग्रा में काजू देने को तैयार है, जबकि एक दूसरी संस्था ने काजू देने की जो दर डाली है, वह 775 रुपये प्रति किग्रा डाली है। ऐसे में यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि विद्यालयों में सामानों की आपूर्ति के नाम पर किस तरह का गड़बड़ झाला है। इस बीच सीडीओ ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए 12 रुपये में 20 लीटर क्षमता वाली बाल्टी का सत्यापन अंतिम निर्णय से पहले किए जाने का निर्देश दिया है। कहा है कि ऐसे सभी सामानों को प्रत्यक्ष तौर पर मंगा लिया जाए, जिनके दर आचर्श्यजनक ढंग से काफी कम हैं।
गौरतलब है कि जिले में कुल 9 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। कमजोर वर्ग की बालिकाओं के लिए सरकार ने इन आवासीय विद्यालयों की स्थापना कर रखी है, जहां पर सभी जरूरी सुविधाएं शासन की तरफ से मुहैया कराई जाती हैं। अब इसी क्रम में इन विद्यालयों में सामानों की आपूर्ति के नाम पर शुरू हुई प्रक्रिया में चल रहा मजाक देखिए। विभाग ने सामानों की आपूर्ति के लिए टेंडर आमंत्रित किया, जिसमें संस्थाओं ने मनमाने ढंग से सामानों की आपूर्ति की दर डाल दिया। निश्चित तौर पर जिनका दर कम होगा, उन्हीं को प्राथमिकता दिए जाने का मोटे तौर पर सिद्धांत है।
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अब इन कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किया गया मजाक समझिए। गोण्डा की एक संस्था ने जो निविदा डाली है, उसमें उसने कहा है कि वह 12 रुपये में प्लास्टिक की 20 लीटर क्षमता वाली बाल्टी की आपूर्ति कर देगी। यहां हैरान कर देने वाली बात यह कि 12 रुपये में प्लास्टिक का एक मग तक ठीक से नहीं मिल सकता। ऐसे में इतनी राशि में 20 लीटर क्षमता वाली बाल्टी की आपूर्ति कैसे व किन परिस्थितियों में हो सकेगी। इसी क्षमता वाली बाल्टी की आपूर्ति करने के लिए गोंडा की ही एक और संस्था आगे आई है।
उसने अपना दर 70 रुपये निर्धारित किया है। एक क्षमता वाली बाल्टी के लिए दोनों संस्थाओं के बीच ऐसे में लगभग छह गुने का अंतर किसी के भी समझ से परे है।
खाद्यान्न आपूर्ति के लिए गोंडा की ही एक संस्था ने 775 रुपये प्रति किग्रा की दर से काजू देने का भरोसा दिलाया है, जबकि उसी जिले की एक संस्था ने आगे आकर कह दिया है कि वह 400 रुपये प्रति किग्रा में ही काजू उपलब्ध करा देगी। विभिन्न सामानों की आपूर्ति के लिए इसी तरह के परस्पर विरोधी व हैरान कर देने वाले अंतर सामने आए हैं।
इसे देखते हुए सीडीओ अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बीएसए को निर्देश दिया है कि वह खरीद कमेटी के सामने इन सामानों को प्रत्यक्ष तौर पर सभी संस्थाओं से मंगवाएं। उनका बारीकी से निरीक्षण किया जाए। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाए। सीडीओ के इस फरमान के बाद सबकी निगाह उस बाल्टी की तरफ लग गई है, जिसे 12 रुपये में ही उपलब्ध हो जाना है।
परस्पर विरोधी व आश्चर्यजनक दरों का मामला सामने आया था। इस पर बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है कि कार्यदायी संस्थाओं से उनके सामान प्रत्यक्ष तौर पर मंगवाकर यह देखा जाए कि उनकी गुणवत्ता कैसी है। उनके नमूने भी रखे जाएं, जिससे आपूर्ति के समय उनकी गुणवत्ता का मिलान हो सके।
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अनूप कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ
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