वर्ष 2010 में हुए मुनीराम हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश ने दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार अकबरपुर कोतवाली अंतर्गत कसेरुआ निवासी अमर बहादुर वर्मा ने वर्ष 2010 में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा था कि 14 सितंबर 2010 को वह अपनी बहन रंजीता से मिलने उसके घर लालापुर मदाराबाद गया था।
रात में खाना खाने के बाद सभी लोग सोने चले गए। रात साढ़े 11 बजे कुछ लोग आए और उनके बहनोई मुनीराम पर हमला बोल दिया। उसकी बहन ने विरोध किया तो उसकी भी पिटाई कर दी। इसी बीच हमलावरों में से एक ने मुनीराम पर गोली चला दी। गोली उनके गले में लगी। इससे वे गिर पड़े।
अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अमर बहादुर की तहरीर पर मुनीराम के बड़े भाई परशुराम व तीन अज्ञात के विरुद्ध केस दर्ज कर छानबीन शरू कर दी। इसी मामले में दो आरोपियों परशुराम व एक अन्य केशवराम वर्मा का मामला सत्र परीक्षण में पेश हुआ।
अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शंकरलाल ने मामले को अत्यंत गंभीर प्रकृति का पाते हुए हत्या के मामले में परशुराम व केशवराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की आधी रकम मृतक मुनीराम वर्मा की पत्नी रंजीता को दिए जाने का निर्देश दिया गया। यह भी निर्देश दिया गया कि दोनों अभियुक्तों द्वारा रंजीता को अलग से 20-20 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा।