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चर्चित राममोहन हत्याकांड मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला

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टांडा। तहसील टांडा के बहुचर्चित राममोहन हत्याकांड में मामला न्यायालय में ट्रॉयल रहने के दौरान सीबीसीआइडी से विवेचना कराने संबंधी राज्य सरकार के निर्देश को उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ ने रद कर दिया है। इस मामले में टांडा के पूर्व सपा विधायक अजीमुलहक पहलवान को नामजद किया गया था, जिनका नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान हटा दिया था।
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बताते चलें कि 4 दिसंबर 2013 की शाम टांडा विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक संजू देवी के भतीजे राममोहन गुप्त की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में पूर्व सपा विधायक अजीमुलहक पहलवान सहित चार लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने सपा विधायक का नाम हटा दिया था। साथ ही घटना का पर्दाफाश करते हुए दानिश इरफान निवासी हयातगंज, अबरार निवासी दियरा रसूलपुर थाना बेवाना, मोहम्मद उमर निवासी पहितीपुर कोतवाली अकबरपुरको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

बाद में हत्याकांड के मास्टर माइड सैफ उर्फ अबूबकर निवासी बेलासपुर थाना इब्राहिमपुर को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने क्लीनचिट पाए पूर्व सपा विधायक समेत अन्य को तलब किया था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इस बीच प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह ने गत 22 फरवरी 2018 को मामला सीबीसीआइडी गोरखपुर को जांच सौंपी थी।
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इसके विरुद्ध पूर्व सपा विधायक ने उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में याचिका की। इसी मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शबीहुलहसन व न्यायाधीश विकास कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सीबीसीआइडी जांच के निर्देश को खारिज कर दिया।
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