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चिकित्सकों की लापरवाही ने ले ली अनशनकारी केशव की जान

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चिकित्सकों की लापरवाही व अपनों की बेरुखी ने ले ली अनशनकारी की जान
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अंबेडकरनगर। चिकित्सकों की लापरवाही ने गुरुवार देर रात जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए एक अनशनकारी केशवडीह की जान ले ली। वंचित समाज के लोगों के हक की मांग को लेकर धरने पर बैठे केशव की तबियत गुरुवार शाम बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां हालत गंभीर होने पर उन्हें चिकित्सकों ने ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। हालांकि लगभग आठ घंटे तक उन्हें इलाज के लिए ले जाने को कोई उपलब्ध नहीं हुआ। इसके चलते रात दो जिला अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने एडीएम व सीएमओ के नेतृत्व में दो अलग-अलग जांच कमेटी गठित कर दी है।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय आजाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवडीह आजाद पिछले कई दिनों से धरिकार समाज को राशनकार्ड व आवास जैसी सुविधा दिलाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के निकट धरने पर थे। सुल्तानपुर जिले के करौंदी कला निवासी केशव अकबरपुर में अकेले ही रहा करते थे। उनके धरना देने के दौरान डीएम सुरेश कुमार के निर्देश पर एसडीएम सदर अभिषेक पाठक ने पांच दिन पहले धरनास्थल पर पहुंचकर वार्ता की थी और कहा था कि प्रशासन नियमानुसार सभी जरूरी प्रक्रिया तय करेगा। हालांकि केशव ने घुमंतू प्रवृत्ति के इन लोगों को तत्काल सभी सुविधाएं दिए जाने से पहले धरना समाप्त करने से इन्कार कर दिया था। गुरुवार अपराह्न बाद धरनास्थल पर उनकी तबियत कुछ बिगड़ गई। प्रशासन ने तत्काल उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया। उन्हें पहले से ही टीबी की बीमारी थी।
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जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने प्रारंभिक उपचार शुरू की। शाम छह बजे चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। उस समय उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए कोई सहयोगी उपलब्ध नहीं हुआ। हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल कर्मियों ने यहां उपलब्ध दवाओं पर ही उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किए रखा, जबकि तत्काल रेफर किए जाने की जरूरत थी। घंटों उन्हें ले जाने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ, तो भी चिकित्सकों की संवेदना नहीं जागी। न तो उन्होंने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी और न ही किसी चिकित्सालय स्टाफ को केशव के साथ लखनऊ रवाना करने की जरूरत समझी गई। इसी लापरवाही में आधी रात से ज्यादा का समय गुजर गया। रात दो बजे करीब चिकित्सकों की लापरवाही व संवेदनहीनता के बीच केशव की मौत हो गई। इससे चिकित्सालय प्रशासन सन्न रह गया।

डीएम सुरेश कुमार ने एडीएम गिरिजेश त्यागी को पूरे प्रकरण की जांच सौंप दी है। इसके साथ ही सीएमओ डॉ. अशोक कुमार भी अलग से जांच दी गई है। सीएमओ सिर्फ चिकित्सालय प्रशासन की भूमिका की जांच करेंगे, जबकि एडीएम द्वारा चिकित्सालय प्रशासन की भूमिका के साथ-साथ यह भी देखेंगे कि धरना मामले में किसी स्तर की कोई चूक तो नहीं रह गई। उधर अकबरपुर कोतवाली पुलिस ने केशव के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अकबरपुर कोतवाल सत्येंद्र सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद सुल्तानपुर जिले के करौंदी कला से आए केशव के भतीजे को शव सौंप दिया गया।

फेफड़े में था संक्रमण
डीएम सुरेश कुमार व एसपी शालिनी ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा कि केशव भूख हड़ताल पर नहीं थे। वे टीबी रोग से पीड़ित थे। उन्हें क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी) के रूप में भर्ती किया गया था। मुख्य चिकित्साधीक्षक की जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया कि उनके फेफड़े में संक्रमण था। चिकित्सकों ने शाम छह उन्हें अग्रिम सघन चिकित्सा के लिए रेफर कर केशव के सहयोगी जयशंकर को सूचित कर दिया था। उनके सहयोगी उन्हें संदर्भित चिकित्सालय नहीं ले गए, जिसके कारण जिला अस्पताल जारी इलाज के बीच देर रात सवा दो बजे उनकी मृत्यु हो गई।
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नहीं बरती गई कोई लापरवाही
जिला अस्पताल लाए गए मरीज केशव के इलाज में कोई भी लापरवाही या ढिलाई नहीं बरती गई। हालत गंभीर देख उन्हें रेफर किया जाना जरूरी था। इसकी सूचना उनके सहयोगी को दी गई थी। उनके द्वारा उन्हें आगे नहीं ले जाया गया। जिला अस्पताल में जो भी संभव उपचार का था, वह पूरी तत्परता से किया गया। -डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस
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