अंबेडकरनगर। ऑयल कंपनियों की बदली हुई क्रेडिट पॉलिसी ने पेट्रोल पंप संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खाड़ी युद्ध के बीच अब तेल कंपनियों द्वारा एडवांस भुगतान मिलने के बाद ही पेट्रोल-डीजल के टैंकर पंप संचालकों को भेजे जा रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम स्तर के डीलरों को आर्थिक परेशानी उठाना पड़ रही है।
जिले में 166 पेट्रोल-डीजल पंपों पर लखनऊ, इलाहाबाद, मुगलसराय और बैतालपुर के डिपो से डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति होती है। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शेष कुमार ने बताया कि आईओसीएल में इंडेंट लगाने पर पहले तीन दिनों के लिए क्रेडिट सुविधा मिलती थी। इसके तहत तेल टैंकर पहुंचने पर भुगतान की सुविधा थी।
एचपीसीएल में इंडेंट लग जाता था लेकिन भुगतान अगले ही दिन करना होता था। अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध के बीच व्याप्त पेट्रोल व एलपीजी गैस की किल्लत के बीच सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों ने अपनी क्रेडिट नीति में बदलाव करते हुए इंडेंट लगाने के साथ ही अग्रिम भुगतान करने की बाध्यता लागू कर दी है।
अब भुगतान के बाद ही ऑयल कंपनियां पेट्रोल व डीजल के टैंकर पंप डीलरों को भेज रही हैं। ऐसे में छोटे पंप संचालकों को वितरण में परेशानी उठाना पड़ रही है। खास तौर पर जिनके पास स्वयं के टैंकर नहीं हैं, उन्हें किराये के टैंकर जुटाने में काफी दिक्कत हो रही है। हालांकि डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष का दावा है कि इन बाध्यताओं के बावजूद जिले में वितरण के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। डीएम अनुपम शुक्ला ने बताया कि जो पेट्रोल पंप ड्राई हो गए हैं वहां के संचालकों से वार्ता कर भुगतान कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है।