अंबेडकरनगर। निजी अस्पतालों के पंजीकरण व नवीनीकरण के नाम पर सीएमओ कार्यालय में रुपये मांगे जाने के मामले में डिप्टी सीएम बृजेश कुमार पाठक ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। करीब आठ माह से लग रहे आरोपों के बीच तीन चिकित्सकों की शिकायत पर डीएम की ओर से गठित समिति की जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है। माना जा रहा है कि आदेश के बाद सीएमओ समेत कई अन्य पर गाज गिर सकती है।
सीएमओ कार्यालय में लगातार मिल रहीं भ्रष्टाचार की शिकायतों पर तत्कालीन डीएम अनुपम शुक्ला ने 12 सितंबर 2025 को एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता की अध्यक्षता में जॉइंट मजिस्ट्रेट प्रतीक्षा सिंह व एसडीएम डॉ. शशिशेखर की टीम गठित की थी। टीम ने मुख्य रूप से तीन प्रकरणों पर जांच की।
जलालपुर के रामगढ़ मार्ग फरीदपुर निवासी सलिल ने शिकायत में बताया था कि उनके भाई डॉ. सौरभ के प्रखर डेंटल क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024-25 में हुआ था। जब आवेदन किया तो सीएमओ कार्यालय के लिपिक महेश कुमार ने पांच वर्ष के नवीनीकरण के लिए प्रति वर्ष 30 हजार रुपये के हिसाब से सीएमओ के लिए 1.50 लाख रुपये व स्वयं के लिए 10-10 हजार रुपये की मांग की। जांच में भी सलिल ने आरोपों के संबंध में शपथ पत्र दिया। जांच टीम ने पाया कि एक साल पहले पंजीकरण के समय औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी नवीनीकरण न किया जाना संदेह की पुष्टि करता है। हालांकि रुपये देने से इन्कार कर दिया गया था।
इसी तरह डॉ. पीयूष उपाध्याय अध्यक्ष आईडीए ने शिकायत में बताया था कि आईडीए के सदस्य नवीनीकरण कराने गए तो उनसे सुविधा शुल्क की मांग की गई। सीएमओ से शिकायत करने पर उन्होंने महेश बाबू से मिलने की बात कही। रकम मांगे जाने पर कई सदस्य वापस आ गए तो कई ऑनलाइन आवेदन का इंतजार कर रहे हैं। इसमें भी नवीनीकरण में देरी के कारण रुपये मांगने के आरोप सही पाए गए।
डॉ. उत्कर्ष उपाध्याय ने शिकायत में बताया था कि शिवानी क्लीनिक व डेंटल केयर अयोध्या मार्ग मीरानपुर का रजिस्ट्रेशन सीएमओ की ओर से नहीं किया जा रहा है। 24 जून 2025 को आवेदन पत्र ऑनलाइन किया गया था। महेश बाबू से मिलने पर उन्होंने कहा कि आप लोग खूब पैसा कमा रहे हैं, कुछ सीएमओ का भी देख लीजिए तो काम हो जाएगा। हालांकि, इस मामले में अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण का भी मामला सामने आया था।
जांच में यह आया था सामने
जांच समिति ने पाया कि रुपये के लेनदेन के प्रमाण नहीं मिले हैं। संबंधित अस्पताल का पंजीकरण एक साल पहले सीएमओ कार्यालय से किया गया था। अगले वर्ष मानकों का पूर्ण न होना या नवीनीकरण न किया जाना संदेह की स्थिति उत्पन्न करता है। शिकायतकर्ता रुपये मांगने के आरोप पर अडिग रहे। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सीएमओ की ओर से पंजीकरण व नवीनीकरण में जानबूझकर अनियमितता की गई। व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए फाइलों को लंबित या स्वीकृत किया गया। सीएमओ की कार्यप्रधानी घोर लापरवाही व पद के दुरुपयोग श्रेणी में आती है।
समिति ने नहीं की न्यायसंगत जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि यह अधिकारी उनके जूनियर हैं, इसलिए इस समिति ने न्यायसंगत जांच नहीं की है। इस पर जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि डीएम के आदेश पर समिति का गठन किया गया और वह सीएमओ के अधीनस्थ नहीं हैं। इसकी रिपोर्ट फरवरी 2026 में शासन को भेज दी गई थी।