जामों। सत्य, सेवा, प्रेम और करुणा का मार्ग अपनाने से जीवन में संतोष मिलता है। भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने से समाज में विश्वास और सद्भाव मजबूत होता है।
यह बात प्रवाचक राम संचित शास्त्री महाराज ने शनिवार को वर्रा गांव स्थित विश्वनाथ धाम परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन कही।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, सत्य और लोककल्याण का प्रतीक है। उनके शासनकाल में राजा और प्रजा के बीच विश्वास का संबंध था। यही रामराज्य की सबसे बड़ी पहचान रही। समाज में आपसी विश्वास, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने से सुख-शांति बनी रहती है। मुख्य यजमान राम कुमार दुबे, हनुमंत दुबे मौजूद रहे।