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पभोक्ताओं ने किया ट्वीट, सरकार बोली, देंगे बिजली

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अंबेडकरनगर। जिले में विद्युत संकट से नाराज उपभोक्ताओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर जिला मुख्यालय वाले अकबरपुर नगर में ही जबरदस्त विद्युत संकट चल रहा है। सोशल मीडिया पर कड़ी नाराजगी जताने के साथ ही ट्वीट के माध्यम से प्रदेश सरकार को भी उपभोक्ताओं ने बदतर हालात से अवगत कराया है। इसमें कहा गया कि जनप्रतिनिधियों से लेकर स्थानीय अधिकारियों द्वारा कोई रुचि नहीं ली जा रही है। सरकार की तरफ से कहा गया कि प्रकरण को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित कर दिया गया है।
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पिछले कई दिनों से समूचे जनपद में विद्युत आपूर्ति का संकट ज्यादा गहरा गया है। नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं का धैर्य भी अब टूट रहा है। पिछले ही दिनों मरैला विद्युत उपकेंद्र पर बार बार गड़बड़ी उत्पन्न होने तथा मनमाने ढंग से शट डाउन लेने से नाराज उपभोक्ताओं ने लाइनमैन के साथ हाथापाई करने की कोशिश की थी। एक दिन पहले भी घंटों बिजली ठप रहने से नाराज मरैला उपकेंद्र के उपभोक्ताओं ने दूरभाष पर विद्युत कर्मियों को खूब खरीखोटी सुनाई। उपकेंद्र के घेराव तक की चेतावनी दी गई। चूंकि आपूर्ति में लापरवाही हो रही है।
इसलिए अपनी कमी भांपते हुए विद्युत कर्मी भी चुप रह गए। इन सब के बीच अब उपभोक्ताओं ने आपूर्ति की बदहाल स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर भी नाराजगी का इजहार शुरू कर दिया है। कई यूजर्स ने कहा कि वर्ष 2017 में 24 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था। कई तरह की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन सब कुछ इसके उलट है। एक यूजर्स रेहान जैदी ने 2017 के वादों का जिक्र करते हुए उपभोक्ताओं से व्यंग में सवाल खड़ा किया कि आखिर अब पूरी बिजली मिल रही है कि नहीं। एक कम्प्यूटर संस्थान के एमडी संजीव कुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिले की विद्युत व्यवस्था ध्वस्त है। प्रतिदिन तार टूटने, केबल जलने तथा ट्रांसफार्मर जलने का सिलसिला जारी है। व्यापारी व आम नागरिक कोरोना संकट के साथ साथ बिजली संकट से भी जूझ रहे हैं।
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कांग्रेस नेता दीपक शर्मा व विकल्प मिश्र ने ट्वीटर के माध्यम से प्रदेश के उर्जा मंत्री व पॉवर कार्पोरेशन अधिकारियों को टैग करते हुए कहा कि समूचा जिला विद्युत संकट से जूझ रहा है। इस पर सरकार की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि जरूरत के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। एक यूजर ने दुर्गेश सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सर्वाधिक काम हुए हैं, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही से स्थिति सुधर नहीं पा रही है।
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