अंबेडकरनगर। रेलवे स्टेशन अकबरपुर के पूर्व छोर पर फुट ओवरब्रिज निर्माण में लापरवाही सामने आई है। फुटओवरब्रिज का पिलर तीन माह पहले ही बनकर तैयार है। अब केवल इस पर लोहे का ब्रिज लगाया जाना है। लगभग छह माह से काम पूरी तरह ठप है। ऐसे मेंं स्कूल बच्चे समेत यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डाल आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले का गठन वर्ष 1995 में हुआ। इसके बाद तेजी से सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने लगा। तहसील तिराहे से लेकर रोडवेज तक हर दिन जाम की समस्या खड़ी होने लगी। इससे नागरिकों को निजात दिलाने के लिए वर्ष 2004 में तहसील तिराहे के निकट से रोडवेज तक ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया। ब्रिज के नीचे से गुजरी रेलवे लाइन ने शहर की करीब सवा लाख आबादी दो भागों में बांट दिया। रोडवेज छोर पर गांधीनगर, पटेलनगर, शास्त्रीनगर, नासरिपुर बरवां और राबीबहाउद्दीनपुर, गौसपुर वार्ड की 40 हजार आबादी के साथ ही सभी सरकारी कार्यालय और आधा दर्जन नामी गिरामी स्कूल स्थित हैं।
दूसरे छोर पर नगर के 19 वार्ड समेत 70 हजार से अधिक आबादी निवास करती है। वाहन से जाने वाले लोग तो ब्रिज के ऊपर से निकल जाते हैं, लेकिन स्कूली बच्चे, आम नागरिक, किसान, ग्रामीण समेत यात्री रेलवे क्रॉसिंग को पार कर अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। तत्कालीन सांसद रितेश पांडेय ने जनता की इस समस्या को सदन में उठाया। इसके बाद रेलवे ने क्रॉसिंग पर 30 लाख रुपये की लागत से बनने वाले फुटओवरब्रिज के निर्माण को मंजूरी दे दी। एक वर्ष पूर्व इसका निर्माण शुरू हुआ। तब लोगों को आस जगी कि अब जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरियों को पार करने से निजात मिल जाएगी।
क्रॉसिंग के दोनों छोर पर कार्य शुरू हुआ। पिलर का निर्माण कराया गया। इसके बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया। छह माह से अधिक समय से कार्य बंद है। ऐसे में हर दिन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे व आमजन अपनी जान को जोखिम में डालकर रेलवे पटरियों को पार करके आवागमन करने को मजबूर हैं।
पत्राचार कराया गया
फुटओवर ब्रिज के लिए पिलर का निर्माण करा दिया गया है। शेष बचा कार्य रेलवे के ब्रिज वर्कशाप द्वारा कराया जाना है। पत्राचार कराया गया है। -प्रियंवदा यादव, अवर अभियंता निर्माण रेलवे