कटेहरी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के प्रह्लादपट्टी गांव में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रवाचक पंकज शास्त्री ने महाभारत कालीन प्रसंगों के माध्यम से कर्तव्य, अधिकार और मर्यादा का महत्व स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को पिता की संपत्ति पर अधिकार प्राप्त है, तो पिता की सेवा करना उसका कर्तव्य भी है। पांडवों के स्वर्गारोहण के पश्चात हस्तिनापुर की सत्ता महाराज परीक्षित को प्राप्त हुई।
परीक्षित ने राज्य को सुदृढ़ करने के लिए तीन अश्वमेघ यज्ञ संपन्न कराए, जिससे उनका यश और प्रभाव बढ़ा। अश्वमेघ यज्ञों के बाद एक दिन परीक्षित अपने कोषागार में रखे संदूक से जरासंध का मुकुट धारण कर शिकार के लिए निकल पड़े। इसी दौरान उन्होंने तप में लीन ऋषि शमीक का अपमान कर दिया और उनके गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया। उन्होंने इसे सत्ता के अहंकार का उदाहरण बताया, जहां विवेक पर अधिकार हावी हो गया। अधिकार के साथ कर्तव्य निभाना अनिवार्य है। सत्ता और शक्ति के साथ विनम्रता आवश्यक है। अहंकार विवेक को कमजोर करता है। इस दौरान रामकमल मिश्र, शिवा, विपिन, बाल मुकुंद मिश्रा, बलभद्र मिश्रा, ओम प्रकाश मिश्रा ,मनोज उपाध्याय, संजीव मिश्रा, जगन्नाथ मिश्रा, बंटी तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।