अंबेडकरनगर। अचानक बदले मौसम के मिजाज के बीच रविवार को लगभग पूरे दिन रुक-रुककर हुई रिमझिम बारिश व सर्द हवा से एक बार फिर से लोगों को ठंड से ठिठुरना पड़ा। खराब मौसम के चलते लोग जल्दी जल्दी जरूरी काम निपटाकर अपने अपने घर चले गए। इससे समय से पहले ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया। उधर बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। उनका कहना था कि यदि हवा के साथ तेज बारिश होती है, तो इससे दलहनी व तिलहनी फसलों के साथ ही गेहूं की फसल को व्यापक नुकसान होगा।
मौसम में उतार चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। कभी तेज धूप निकलने से तापमान में वृद्धि होती है, तो कभी बारिश व सर्द हवाओं के चलने से ठंड बढ़ जाती है। इस बीच रविवार को सुबह से ही मौसम के मिजाज में परिवर्तन हुआ। आसमान पर काले बादल छा गए। साथ ही सर्द हवाएं चलने लगीं। इसके बाद रिमझिम बारिश का दौर शुरू हो गया। यह दौर रुक रुककर लगभग पूरे दिन तक चलता रहा। नतीजा यह हुआ कि एक बार फिर से तापमान में तेजी से गिरवट हुई, जिससे लोग ठंड से ठिठुर उठे। राहगीर होटलों व ढाबों पर चाय की चुस्कियां लेकर ठंड से बचने की कोशिश करते दिखे। खराब मौसम के चलते लोग जरूरी काम जल्दी जल्दी निपटाकर अपने अपने घर चले गए। इसके चलते समय से पहले ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया।
मार्च माह में इस प्रकार के मौसम को लेकर बुजुर्ग आश्चर्यचकित हैं। 70 वर्षीय रामबुझावन ने कहा कि पूर्व में खिचड़ी पर्व के बाद से ही तापमान में वृद्धि होने लगती थी। मार्च माह में गर्मी शुरू हो जाती थी। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि मार्च माह में भी दिसंबर जैसी ठंड का एहसास हो रहा। 65 वर्षीय सिंगारी देवी व 60 वर्षीय शकुंतला ने इसे लगतार प्रदूषित होते पर्यावरण का कारण बताया। कहा कि प्रदूषण के चलते ही मौसम में इस प्रकार का बदलाव आया है।
किसानों की बढ़ी चिंता
मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न कर दी हैं। अकबरपुर के किसान रामबली वर्मा व गौरीशंकर ने कहा कि मौसम के उतार चढ़ाव का प्रतिकूल प्रभाव दलहनी व तिलहनी फसल के साथ-साथ आलू व गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। वातावरण में नमी के चलते गेहूं की बाली नम रहेगी। इससे दाने छोटे हो जाएंगे। भीटी जगदंबा व रामअख्श सिंह ने कहा कि अभी तो विशेष नुकसान नहीं है, लेकिन यदि हवा के साथ तेज बारिश होती है, तो इससे गेहूं व आलू की फसल को व्यापक नुुकसान होगा। महरुआ के राजेश व जहांगीरगंज के गिरधारी ने कहा कि गेहूं की फसल के लिए ऐसा मौसम कतई सही नहीं है। यदि तेज धूप नहीं निकली और आर्द्रता समाप्त नहीं हुई, तो इसका प्रभाव उपज पर पड़ेगा।